स्वार्थनिष्ठ व्यक्ति महापुरुषों की महानता का सही आकलन नहीं कर सकते हैं
!आज डॉ आंबेडकर का जो सभी राजनैतिक दलों द्वारा गुण गान किया जा रहा है
उसका कारण राजनेताओं का राज नैतिक स्वार्थ है !डॉ अम्बेडकर हिन्दू धर्म से
छुआ छूत को समाप्त करना चाहते थे !इस छुआ छूत की व्य्वश्था का पोषक बो
वर्णाश्रम धर्म को मानते थे ! गांधी जी और उनके दृष्टिकोण में इस मामले को
लेकर सतही मतभेद था !गांधी जी विकृत वर्ण व्यवस्था के समर्थक नहीं थे !वह
कहते थे कि अगर हिन्दू धर्म में इस छुआ छूत का नाश नहीं हुआ
तो हिन्दू धर्म का नाश हो जायेगा !इसीलिए उन्होंने छुआ छूत का जो सबसे
निकृष्ट कार्य था पाखाना साफ़ करने का उसको अपने आश्रम का महत्त्व पूर्ण अंग
बनाया था !वह स्वयं संडाशों की सफाई करते थे और सभी आश्रम वासीयों को
पाखाना अनिवार्य रूप से साफ़ करना पड़ता था !गांधी जी ने नेहरू जी से कह कर
डॉ अम्बेडकर को कानून मंत्री और श्यामा प्रसाद मुखेर्जी को मंत्री मंडल में
शामिल कराया था ! उस समय की राजनीति में सामाजिक व्यवश्था परिवर्तन और देश
की सेवा ही मुख्य लक्छ्य था !इसीलिए सभी राष्ट्रीय नेताओं का लक्छ्य देश
के लिए अपनी योग्यता और सामर्थ्य को सम्पर्पित करना था !धीरे धीरे इस
दृष्टि का अभाव राजनेताओं में बढ़ता गया और राजनीति में स्थान पक्का करने की
इक्छा का विकास बढ़ता गया !और आज यह चरम विंदू पर पहुंचा दिखाई देता है
!सामाजिक व्य्वश्था को न्याय पर आधारित समत्व्व युक्त स्वरुप देने वाले डॉ
अम्बेडकर कर्ज में मृत्यु को प्राप्त हुए !किन्तु आज दलित उत्थान की बात
करने वाले नेताओं के पास अकूति धन संचय हो गया है !सभी पार्टियों के
राजनेता अकूत संपत्ति के मालिक है !जबकि राजनीति में प्रवेश के पहले बे
अत्यंत सामान्य घरों से आये थे !आज डॉ अम्बेडकर की समाज व्यवस्था परिवर्तन
एक जाति विशेष तक सीमित हो कर रह गयी है !यही हाल पिछड़ी जातियों का है
!किन्तु इतिहास यह बताता है !की स्वार्थी व्यक्ति अपने पतन का इतिहास स्वयं
लिखते हैं !डॉ अम्बेडकर की चर्चा भले हे स्वार्थ दृष्टि से दलित सवर्ण
पिछड़े नेता करें किन्तु डॉ अम्बेडकर के विचार जैसे जैसे आने वाली पीढ़ियों
के सामने आएंगे तब इन स्वार्थी नेताओं का स्वार्थ का प्रकोप इन्ही स्वार्थी
नेताओं की खोपड़ी पर पड़ेगा और डॉ अम्बेडकर के साथ किया गया विश्वासघात इनको
इतिहास के उस स्थान में पहुंचा देगा जो स्थान विश्वास घातियोँ के लिए
सुरक्छित रहता है
No comments:
Post a Comment