हंटर जाँच समिति के सामने जनरल डायर ने जाँच समिति के प्रश्नों के उत्तर में कहा था --------- १-जब आप बाग में पहुंचे तब आपने क्या किया ? उत्तर --- मेने गोली चलाई ! २-- एकदम ? उत्तर ----तत्काल मेने इस विषय में विचार कर लिया था और मेरा ख्याल है कि यह निश्चय करने में मुझे ३० सेकण्ड से अधिक नहीं लगे ३---- जहांतक भीड़ का सम्बन्ध है ,वह वहां क्या कर रही थी ? उत्त्तर ----वहां बे लोग सभा कर रहे थे ,बीच में एक ऊंची सी चीज पर एक व्यक्ति खड़ा था उसके हाथ हिल रहे थे स्पष्ट ही वह भासन दे रहा था !४----- जब आपने भीड़ को तितर बितर किया ,क्या भीड़ ने उसके पूर्व कोई कार्यबाही की थी ?उत्तर --- नहीं बे भाग गए थे ! जन मेने गोलियां चलाना शुरू किया तो मध्य भाग में जो बड़ी भीड़ थी ,वह दाहनी और भागने लगी थी जब भीड़ भागने लगी थी तब आपने गोली चलाना बंद क्यों नहीं किया ?उत्तर ----मेने सोचा कि यह मेरा कर्त्तव्य है कि जब तक गोली चलाता रहूं जब तक बे बिलकुल भाग ना जाएँ !
--------- जनरल डायर ने १६५० गोलियां चलाईं थी ! उन्होंने यह भी स्वीका किया था कि यदि बे बख्तरबंद गाड़ियां बाग़ के अंदर ले जा सकते ,तो बे अवश्य ऐसा करते और उनसे गोलियां चलवाते ! उन्होंने गोलियां चलाना इसीलिए बंद कर दिया था क्योंकि कारतूस ख़त्म हो गए थे और भीड़ बहुत अधिक थी ! उन्होंने घायलों को प्राथमिक चिकत्सा के लिए ले जाने की कोई व्यबस्था नहीं की थी ! भीड़ में घायल लोगों की प्राथमिक चिकित्सा कराना बे अपना कर्तव्य नहीं मानते थे ! प्रत्यक्छ दर्शी गबाह लाला गिरधारी लाल ने अपने व्यान में कहा था !कि मेने सेकंडों लोगों को जहाँ तहांमरते देखा था ! सबसे बुरी बात यह थी कि गोलियां उन रास्तों पर चलाईं जा रही थी जहाँ से लोग बाहर की और भाग रहे थे ! निकलने के लिए केवल ४,५ छोटे रास्ते थे और इन सभी रास्तों पर भीड़ के ऊपर गोलियों की बौछार हो रही थी ! कई लोग भागती हुई भीड़ में पैरों के नीचे कुचल कर मर गए थे ! खून की नदियां बह रही थी ! जो लोग जमीन पर लेट गए थे उन पर भी गोलियां चलाई गयीं थी ! मृतकों या घायलों के लिए अधिकारियों ने कोई प्रबन्ध नहीं किया था ! तब मेने घायलों को पानी पिलाया और उनकी जो सहायता में कर सकता था वह की मेने पूरी जगह का चक्कर लगाया और वहां पडी लगभग एक एक लाश को देखा ! जगह जगह पर मृतकों के ढेर लगे हुए थे ! मृतकों में व्यस्क और किशोर दोनों ही थे ! किसी की खोपड़ी खुल गयी थी और किसी की आँख गोली से उड़ गयी थी किसी की नाक किसी का सीना किसीके हाथ पैरों के टुकड़े टुकड़े उड़ गए थे ! मेरा ख्याल है कि मैदान में १००० से अधिक लाशें थी ! मेने देखा कि लोग जल्दी जल्दी भाग रहे थे !और बहुतों को अपने घायल या मृतक परिजनों को वहां छोड़ना पड़ा था ,क्योंकि उन्हें भय था कि रात के ८बजे के बाद उन पर फिर गोली चलाई जायेगी ! !
--------- जनरल डायर ने १६५० गोलियां चलाईं थी ! उन्होंने यह भी स्वीका किया था कि यदि बे बख्तरबंद गाड़ियां बाग़ के अंदर ले जा सकते ,तो बे अवश्य ऐसा करते और उनसे गोलियां चलवाते ! उन्होंने गोलियां चलाना इसीलिए बंद कर दिया था क्योंकि कारतूस ख़त्म हो गए थे और भीड़ बहुत अधिक थी ! उन्होंने घायलों को प्राथमिक चिकत्सा के लिए ले जाने की कोई व्यबस्था नहीं की थी ! भीड़ में घायल लोगों की प्राथमिक चिकित्सा कराना बे अपना कर्तव्य नहीं मानते थे ! प्रत्यक्छ दर्शी गबाह लाला गिरधारी लाल ने अपने व्यान में कहा था !कि मेने सेकंडों लोगों को जहाँ तहांमरते देखा था ! सबसे बुरी बात यह थी कि गोलियां उन रास्तों पर चलाईं जा रही थी जहाँ से लोग बाहर की और भाग रहे थे ! निकलने के लिए केवल ४,५ छोटे रास्ते थे और इन सभी रास्तों पर भीड़ के ऊपर गोलियों की बौछार हो रही थी ! कई लोग भागती हुई भीड़ में पैरों के नीचे कुचल कर मर गए थे ! खून की नदियां बह रही थी ! जो लोग जमीन पर लेट गए थे उन पर भी गोलियां चलाई गयीं थी ! मृतकों या घायलों के लिए अधिकारियों ने कोई प्रबन्ध नहीं किया था ! तब मेने घायलों को पानी पिलाया और उनकी जो सहायता में कर सकता था वह की मेने पूरी जगह का चक्कर लगाया और वहां पडी लगभग एक एक लाश को देखा ! जगह जगह पर मृतकों के ढेर लगे हुए थे ! मृतकों में व्यस्क और किशोर दोनों ही थे ! किसी की खोपड़ी खुल गयी थी और किसी की आँख गोली से उड़ गयी थी किसी की नाक किसी का सीना किसीके हाथ पैरों के टुकड़े टुकड़े उड़ गए थे ! मेरा ख्याल है कि मैदान में १००० से अधिक लाशें थी ! मेने देखा कि लोग जल्दी जल्दी भाग रहे थे !और बहुतों को अपने घायल या मृतक परिजनों को वहां छोड़ना पड़ा था ,क्योंकि उन्हें भय था कि रात के ८बजे के बाद उन पर फिर गोली चलाई जायेगी ! !
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