शहर में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को ८ बजे के बाद घर से निकलने की इजाजत नहीं है ! ८ बजे के बाद यदि कोई भी व्यक्ति बाहर दिखाई देगा तो उसे गोली मारी जा सकती है ! इस घोसणा के कारण लोग बहुत अधिक भयभीत थे इसीलिए बहुत से घायल जो बाग़ से निकलने में कामयाब हो गए थे बे रास्ते में सहायता प्राप्त ना होने के कारण घाओं से मरगए और सड़कों पर पड़े रहे ! बैसाखी का पर्व अमृतसर की जनता को इस तरह से मनाना पड़ा था ! मृतकों की संख्या की गड़ना के सम्बन्ध में जांच सरकार ने २० अगस्त से शुरू की थी ! अर्थात गोली काण्ड के ४ महीने बाद सरकारी जाँच में कहा गया था कि गोली कांड में २९० से अधिक लोग नहीं मरे थे ! किन्तु सेवा समिति द्वारा की गयी जाँच में मरने वालों की संख्या ५०० बतायी गयी थी जिसे सरकार ने भी स्वीकार कर लिया था ! किन्तु ठीक संख्या की गढ़ना कभी भी नहीं हो सकी थी ! लाला गिरधारी लाल ने हिसाब लगाकर जो १००० संख्या बतायी थी वह अधिक प्रमाणिक थी ! १३ तारीख की बीभत्स घटना का तफ्सील से व्यान कर सकना ----जस्टिस रेकिन के शब्दों में संभव नहीं था ! कांग्रेस ने जालिया वाले गोलीकांड की जांच के लिए एक समिति गठित की थी ! उसमे महात्मा गांधी ,सी आर दास अब्बास एस तैयबजी,और एम आर जयकर थे ! उस जाँच समिति ने अपनी जाँच के निष्कर्ष में कहा था कि जरनल डायर,कर्नल जॉनसन ,कर्नल ओ ब्रायन श्री बॉसवर्थ ,स्मिथ ,राय साहब श्री राम सूद और मलिक साहब खान ने ऐसे घोर अवैधानिक कृत्य किये हैं कि इन सबको विशेष अदालत में खड़ा किया जाय ! कर्नल मेकरे और कप्तान डोबतन ने भी अपना दायितव निभाने में ही उतनी ही चूक की है ! लेकिन इन अधिकारियों के खिलाफ भी सरकारी कार्यबाही करने की सलाह हमलोगों ने जान बूझ कर नहीं दी है ! क्योंकि ये दोनों अधिकारी अन्य अधिकारियों की भांति अनुभवी नहीं थे !
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