आज
विश्व स्वास्थ्य दिवस है !इस दिवस को भौतिक स्तर पर मनाने की शुरुआत वहां
से हुई है !जिन्होंने विश्व के स्वास्थ्य के बिगाड़ने की तमाम प्रबृत्तियों
का आविष्कार किया और उन स्वास्थ्य बिनाशक अविष्कारों का विकास बिगत वर्षोँ
में किया और अभी भी लगातार कर रहे हैं !किन्तु अब उनकी इन स्वास्थ्य
विनाशक क्रियायोँ का तीब्र विरोध उन देशों में ही प्रारम्भ हो गया है !
स्वस्थ्य के संरक्छन के लिए जिन दबाएं का निर्माण किया गया उनका परीक्छन
निर्दोष बेजुबान जनबरों पर किया गया !जिस कारन हिंसा का तत्त्व उन दबाएं
में समां गया और उन दबाएं के सेवन से मनुष्य शरीर की दृष्टि से तो स्वस्थ
हुआ किन्तु मानशिक दृष्टि से क्रूर और हिंसक हो गया ! तथा जीव दया के स्थान
पर जीव हिंसा ही उसके जीवन का ध्येय हो गया !परिणाम स्वरुप उसके भोजन का
प्रधान अंग माशाहार हो गया !और उनकी प्रबृत्ति भी पशुबत हो गयी है !
भारी मात्रा में जीव हत्याओं से पर्यावरण भी प्रदूषित हुआ है और अनेक
प्राकृतिक विपदाएँ भी मनुष्योँ के असितत्त्व पर भी प्रश्न चिन्ह लगाने लगी
हैं !अब पश्चिमी राष्ट्र भी इन विश्व ब्यापी संकटों से निबृत्ति के रूप
में जीवों के संरक्छण के लिए विविध प्रकार के आयोजन कर रहे हैं !और शाकाहार
अपना रहे हैं !कुछ राष्ट्रों ने तो सप्ताह में एक दिन माशाहार कानून
बनाकर प्रतिबंधित किया है ! किन्तु आश्चर्य यह है कि विश्व स्वाथ्य दिवस
भारत में मनाने की भी जरुरत पड़ रही है! कि जिसकी संस्कृति के मूल में ही
प्राणिमात्र के अखंड स्वास्थ्य सम्बर्धन संरक्छण और विकास का सनातन बीज
विद्यमान है और जिसका उद्घोष ही सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः
है (सभी प्राणी सुखी और सवाथ हों ) तथा जिस देश ने यह पहचान लिया था कि
ब्रक्छोँ लताओं में भी जीवन है! और पर्वतो पृथ्वी और जल में भी परमात्मा का
निवास है 1 और सभी जीव जन्तु अवध्य हैं!और इन सब तत्त्वों को अंदर धारण
करने के लिए प्रतिनिधि के रूप में सम्पूर्ण प्रकार से प्राणी कल्याण को
संरक्छित करने वाली स्वास्थ्य प्रदान करने वाली और अपने दूध से मात्रबत
पोषण देने वाली और गोबर और मूत्र से औषधि तथा कृषि के लिए अमृत तुल्य खाद
देने वाली तथा मृत्यु के बाद भी अपनी हड्डी चार्वी आदि से उत्तम खाद प्रदान
करने बाली और पुत्र रूप में कृषि कार्य के रूप में अपने पुत्र अर्पित करने
वाली सर्व मंगल मयी सर्व कल्याण मयी करुणा प्रधान गाय को महत्त्व प्रदान
किया था और लोक स्वास्थ्य का स्थायी उपाय खोज निकाला था ! किन्तु हम भारत
बसिओ ने उसी को अपना भोजन बना लिया है !परिणाम स्वरुप उसके मास का
भाक्छन् करने वाले तर्क देते हैं कि उसके मास से उन्हें सस्ता प्रोटीन
प्राप्त होता है और खाने पीने के अधिकार का हनन होता है ! किन्तु
दुर्बुद्धि और पशु प्रबृत्ति होने के कारण ये दुष्ट लोगयह भूल जाते हैं कि
गाय का मांश के खाने से लोकमंगल और लोक स्वास्थ्य का नाश भी होता है !फिर
मॉस खाने वाले लोगों के लिए और भी तमाम तरह के मास खाने के लिए हैं !बे
बकरा मुर्गा कुत्ता गधा छिपकली सांप सूअर चूहा बिल्ली आदिका भी मास खा सकते
है और खाते भी है !फिर सिर्फ गाय का मास के खाने पर ही क्योँ अड़ कर आम
लोगों को उसके घी दूध मक्खन आदि तथा खाद और औषधीय गुणों से वंचित कर रहे
हैं !काटजू भी सूअर कि चाप खाएं उसकेसम्बन्ध में फिल्म स्टार ऋषिकपूर ने
कहा है कि वह बहुत स्वादिष्ट होती है !और काटजू गाय के पक्छ में अपना
फैसला सुनाएँ !तथा गाय को माता कि तरह पूजने वाले भी गाय माता का दर्ज दें
और उसको कूड़ा करकट खाने पर मजबूर ना करें !और हिंदुस्तान कि जमीन से यह
सन्देश विश्व को दे कि विश्व को स्वस्थ रखने का फार्मूला भारत के पास गाय
के पालने पोषण के रूप में हैं और विश्व को भो स्वास्थ्य सम्बर्द्धन के लिए
उसका प्रयोग और उपयोग करना चाहिए !नरोत्तम स्वामी सिविल लाइन्स झाँसी
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