कश्मीरी पंडितों के साथ कश्मीर की सरकार राज धर्म का पालन नहीं कर रही है
!१९८९ ९० में आतंक बाद के कारण विश्थापित हुए ५७६९७ कश्मीरी पंडितों के
परिवार अपने ही देश में अभी भी शरणार्थी की तरह रह रहे हैं !जिन आतंक
बादियोँ के कारण उन्हें अपना घर द्वार जर जमीन छोड़ना पड़ा !उनको आज तक सरकार
ने विधान के अनुसार दण्डित नहीं किया !जैसे काठ का हाथी चमड़े का हिरन
हिजड़ा मनुष्य उसरखेत और वर्षा ना करने वाले बादल सब व्यर्थ होते हैं ऐसे ही
अपराधियोँ को दंड ना देने वाली सरकार भी सर्वथा निरर्थक ही होती
है ! जो निरपराध नागरिकों की रक्षा करे और अपराधियोँ को दण्डित करे और
उनको अपराध करने से रोके वही सरकार कहलाने योग्य होती है !कश्मीरी पंडितो
के साथ इस राजधर्म का पालन ना केंद्र की सरकार ने किया और ना राज्य की
सरकारों ने !कश्मीरी पंडित अब उन आतंक बादियोँ के साथ नहीं रहना चाहते हैं
जो सरकार के संरक्छण में आतंकबादी गतिविधिओं को अंजाम देते हैं !और उनकी
दमदार आवाज यासीन मालिक जैसे अलगाओबादी नेताओं के मुख से मुखरित होती है
!की अगर कश्मीर में पंडितो को अलग से जमीन दी गयी तो कश्मीर इजराइल बन
जायेगा !कश्मीरी पण्डितोँ में अगर यहूदिओं कैसी ताकत होती तो बे अपनी आँखोँ
के सामने टूटते हुए मंदिर उजड़ते हुए घर बे इज्जत होती महिलाओं को कभी
वर्दास्त ना करते और आतंकबादिओं के अन्याय के विरुद्ध खड़े होते !किन्तु
उनके साथ दुहरा दुर्भाग्य जुड़ गया है !ना उनमे शक्ति है मुकाबला करने की और
ना ही कश्मीर की आतंकबादी समर्थक सरकार उनकी न्यायोचित मांग मान रही है
!अब भारत सरकार इस मामले में क्या करती है ?
No comments:
Post a Comment