मंजिल प्राप्ति के मार्ग को नष्ट किया जा रहा है -------- मंजिल पर पहुँचने के लिए पुरुषार्थी और परमार्थी लोग मार्ग निर्माण करते थे !यही जीवन पद्धति भविष्य के समग्र विकास की मार्ग दर्शक और प्रेरणा श्रोत्र होती थी !अब यह विकास की परम्परा भारत में टूटती जा रही है !विकास के लिए अब लागों की तैयारी संपूर्ण विनाश की है !सबके पास दिल दिमाग और ऑंखें है !सबलोग इस को देख और समझ सकते हैं !फिर भी कुछ उदाहरण यहां प्रस्तुत हैं !विद्यार्थी विना पढ़े प्रथम श्रेणी की डिग्री नक़ल करके प्राप्त कर रहे हैं !इस कार्य में उनके माता पिता और अध्यापक उनका सहयोग कर शिक्छा प्राप्त के मार्ग को नष्ट कर मंजिल की प्राप्ति करा रहे हैं !अधिकारी कर्मचारी अदि काम नहीं कर रहे हैं !काम करने के लिए रिश्बत ले रहे हैं ! और सुविधा ,वेतन और पेन्सन अदि के लिए हड़ताल और आंदोलन कर रहे हैं ! न्यायाधीश लम्बित मुकददमों के लिए न्यायाधीशों की कमी के लिए रो रहे हैं !अधिवक्ता हड़ताल कर रहे हैं ! कानून की विरासत ,शक्ति और सामर्थ्य का विनाश कर ,रिश्बत खोरी का विरोध ना कर अपने को सम्मानित घोषित कर रहे हैं !प्रवचन करने वाले धार्मिक मंचों से अधर्म के प्रतीक रावण ,कंस अदि की निंदा कर रहे हैं !तप त्याग ,संयम ,साधना ,भगवत भक्त आदि का गुण गान कर रहे हैं ! किन्तु अधर्म की बृद्धि हो रही है और धर्म के सदाचार ,नीति आदि के आवश्यक अंगों का लोप हो रहा है ! धर्म की प्राप्ति के लिए धर्म के मार्ग को नष्ट किया जा रहा है !सन्सद से लेकर विधान सभा और गाओं सभा तक के निर्वाचन के लिए लोकतांत्रिक प्रक्क्रियाओं को नष्ट कर जनप्रीतिनिधि चुने जा रहे हैं !राजनीति में षड्यंत्र झूठ और कूटनीति ,झूठी प्रशंशा ,निंदा और चरित्र हनन का आधिपत्य हो गया है !पद प्राप्ति के लिए लोकतंत्र का मार्ग नष्ट किया जा रहा है !समाचार पत्र और दृश्य मीडिया सही समाचार न पहुंचाकर मीडिया की निष्पक्छ्ता की प्रमाणिकता को नष्ट कर रहे है !महगाई से पीड़ित जनता नित्य अच्छे दिनों के आगमन की प्रतीक्छा कर रही है !ये सब कौन कर रहा है ? हमीं सब सामूहिक और व्यक्तिगत रूप से कर रहे हैं !क्योंकि चपरासी से लेकर प्रधान मंत्री तक हम ही बैठे हुए हैं !सभी रूपों स्वरूपों में हम ही विदयमान हैं ! हम ही हैं जो हम सुधरेंगे तो जग सुधरेगा का नारा लगा रहे हैं !और हम ही इस नारे कोविफल कर रहे हैं ! अपना सुधार संसार की सबसे बड़ी सेवा है !इसका उद्घोष करने वाले लोग आत्मसुधार के मार्ग को नष्ट कर रहे हैं !हमलोग महापुरुषों के कथनों को जो उनके जीवन के अनुभव से निकलते हैं !उनका लेखन ,पाठन और कथन तो करते हैं !किन्तु इन कथनों की प्राप्ति के लिए मार्ग का निर्माण नहीं करते हैं !उलटे इस परमार्थ के मार्ग को अपने स्वार्थ से नष्ट करते हैं !अगर हमें मंजिल तक पहुँचना है तो मार्ग का निर्माण भी करना होगा !यश की धरोहर की प्राप्ति सिर्फ शव्दों से नहीं हो सकती है ! अभी तो हमारी गति मार्ग नष्ट कर मंजिल प्राप्ति की ही है ! l
No comments:
Post a Comment