भ्रष्टाचारी, ही भ्रष्टाचार विरोध का मन्त्र जाप कर रहे हैं ------- भ्रष्टाचार करने वालों ने एक नया तरीका ईजाद किया है !वह है छिप कर और खुलकर जैसे भी कर सकते हो भ्रष्टाचार करो और भ्रष्टाचार का जोर दार विरोध भी करो ! देश की विकास यात्रा ,प्रमाणिकता ,मानवता ,धार्मिकता ,वैधानिकता ,स्वस्थ्य ,शिक्छा ,पारिवारिक सम्बन्ध विश्वसनीयता अदि सभी सत्कर्म भ्रष्टाचार ने नष्ट कर दिए हैं !भ्रष्टाचार इतनी तीव्रगति से बढ़ा है और बढ़ रहा है कि इसने तूफ़ान का रूप ले लिया है !जैसे अंधड़ में आँखों में धूल भर जाती है जिस से दिखना बंद हो जाता है !उसी प्रकार भ्रष्टाचार के जनक लोभ ,लालच की आंधी ने भ्रष्टाचारियों को अंधा कर दिया है !अब उनको अपने स्वार्थ के अलावा और कुछ नहीं दिखाई दे रहा है ! भ्रष्टाचार निवारण के उपाय के रूप में यदि कर्तव्य निष्ठा का पालन करना लोग शुरू करें तो इसका प्रभाव कुछ कम हो सकता है !एक बार अगर लोग भ्रष्टाचार से मुक्त जीवन जीने का लाभ लेने लगें तो जितना लाभ अभी भ्रष्टाचारियों को भ्रष्ट आचरण से प्राप्त हो रहा है उस से कई गुना लाभ उनको कर्तव्या पालन से होगा ! और देश की भी सभी रचनात्मक गतिविधियाँ भ्रष्टाचार से मुक्त हो जाएंगी !सभी देश बासियों का एक ही नारा होना चाहिए ! हमें चाहिए भ्रष्टाचार मुक्त भारत ! सभी प्रकार की समस्याओं से मुक्ति भ्रष्टाचार मुक्त भारत के निर्माण से होगी !
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