Monday, 11 April 2016

६अप्रिल और १३ अप्रैल ---------इन तिथियों को भुलाया नहीं जा सकता है ! ६अप्रिल ने भारत में एक जीवनी शक्ति का संचार किया था  !और १३ अप्रेल ने निरपराध लोगों का रक्त बहाकर जालियां बाले बाग़ को समस्त देश के लिए पवित्र तीर्थ बना दिया था ! ६अप्रेल को रॉलेट एक्ट के विरोध  में देश व्यापी सत्याग्रह का प्रारम्भ हुआ था ! और वह एक निष्प्राण चीज बनकर रह गया था !   १३ अप्रेल को वह अतीब क्रूरतापूर्ण घटना ही नहीं घटी बल्कि उसमे हिन्दुओं और मुसलमानो का रक्त एक साथ एक होकर बहा था ! १३ अप्रेल को सुबह ९.३० बजे के लगभग जनरल डायर ने एक अंगरकछक टुकड़ी के साथ शहर में प्रवेश किया था ! और एक घोसणा की थी कि शहर में या शहर के किसी भी भाग में या शहर के बाहर किसी भी प्रकार का कोई भी जुलूस किसी भी समय निकालने की मुमानियत है ! इस प्रकार के किसी भी जुलूस या ४ व्यक्तियों के जमघट को गैर कानूनी जमघट माना जाएगा और आवश्यक होने पर शस्त्र बल से तितर बितर कर दिया जाएगा ! जनरल डायर ज्यों ज्यों शहर में आगे बढ़ते गए इस घोसणा को पंजाबी और उर्दू में एक दुभाषिया पढता गया ! जिस समय यह घोसणा हो रही थी उसी समय एक लड़का अमृतसर की गलियों में कनस्तर बजाकर ऐलान कर रहा था ! कि ४ बजे जालियाँ वाले बाग़ मेंएक सभा होगी और लाला  कन्हैया लाल उसका सभापित्तव करेंगे ! करीब  १२.४५ मिनट पर जनरल डायर को सूचना दी गयी की उसी दिन सायंकाल ४.३० मिनट पर जालियाँ वाले बाग़ में एक बड़ी सभा होने वाली है  !जनरल डायर ने हंटर जाँच समिति के आगे यह अपने व्यान में स्वीकार किया था कि सभा को रोकने के लिए उन्होंने कोई कदम नहीं उठाया था ! ४ बजे उन्हें निश्चित सूचना मिली की सभा शुरू हो गयी है ! जल्द्दे ही बे नाके बंदी के लिए सैनिक लेकर शहर की ओर चलपडे ! इनमे २५ राईफल वाले गोरखे और २५ सिख भी शामिल थे ! उनके साथ ४० गोरखे और थे जिनके पास खुखरियाँ थी ! और बे अपने साथ दो बख्तरबंद गाड़ियां भी साथ ले गए थे ! बे ५ बजे शाम को जालियाँ बाले बाघ में पहुंचे थे ! जालियावाला बाग नहीं था  !जालियां उसके मूल मालिकों का जाति नाम है !यह स्थान मकानों से घिरा एक परती जमीन का टुकड़ा था ! इस स्थान पर एक टूटी फूटी गुंबददार समाधि थी और एक कुआँ था ! अंदर जाने का मुख्य रास्ता एक तांग गली से था उसमें बख्तरबंद गाड़ियां नहीं जा सकती थी ! अंदर जाने के लिए और कोई रास्ते नहीं थे सिर्फ ४,५ स्थानों पर संकरे रस्ते से बाहर निकला  जा सकता था ! जनरल डायर ने ९० सैनिकों के साथ बाग़ में प्रवेश किया था ! उस समय भीड़ के लिए बाहर निकल सकने के लिए कोई आसान  रास्ता नहीं था ! जनरल डायर के पहुँचने के पहले सभा में लगभग २०००० लोग थे ! हंसराज व्याख्यान दे रहे थे बे और थोड़े से दूसरे लोग एक मंच पर खड़े थे सैनिकों के पहुंचने से पहले एक वायुयान सभास्थल के ऊपर मड़रा  रहा था ! श्रोताओं में बहुत से बच्चे और लडके थे ! और कुछ लोग गोद में शिशुओं को भी लेकर आये थे ! लोग पूरी तरह  निहत्थे थे ! ख़ुफ़िया पुलिस के भी कुछ लोग सभा में मौजूद थे ! जनरल डायर ने २५ सैनिक बाईं और और २५ सैनिक दाईं और तैनात कर दिए थे  !     

No comments:

Post a Comment