नेता
अधिकारी कर्मचारी बहुत धार्मिक हो गए हैं !और सरकारी कर्तव्य कर्म का
त्याग कर सरकारी साधनो से धार्मिक आयोजनो में शामिल भी होते हैं !मुख्य
मंत्री मंत्री स्तर के नेता तो हेलीकाप्टर से यात्रा करते हैं !इसीलिए उनको
टूटी फूटी गड़्ढोँ से युक्त सड़कों पर यात्रा करने से होने वाले कष्टों से
नहीं गुजरना पड़ता है !और जो इनसे छोटे स्तर के नेता है उनके पास भी लक्छरी
कारें हैं !इसिलए बे भी आराम से इन सड़कोँ से निकल जाते हैं !धार्मिक प्रवचन
करने वाले कथा व्यास भी इन नेताओं को अपना भर पूर आशीर्बाद
प्रदान करते हैं !धामिक श्रद्धा का दर्शन तो इन आयोजनो में होता है
!किन्तु धार्मिक धारणा का दर्शन इन आयोजनो में नहीं होता है !अपने
स्वार्थोँ की पूर्ति में संलग्न ये लोग सड़कों के लिए दिया गए धन से ये
अपना बैंक बैलेंस बढ़ाते हैं! और आम जनता के लिए नर्क का निर्माण करते हैं!
धर्म धारणा का जो सिद्धांत कर्तव्य निष्ठां का है उसका संपूर्ण अभाव
आयोजकों प्रवचन कर्ताओं में और इन श्रद्धा व्यक्त करने वालों में पूर्ण रूप
से देखा जा सकता है !अनीति से उपार्जित धन से इन आयोजनो को संपन्न कराने
से और कथावाचकोँ से आशीर्वाद प्राप्त कर ये लोग नए उत्साह के साथ कर्तव्योँ
की अवहेलना करने के लिए और अपने निम्न स्वार्थोँ की पूर्ति के लिए पुरे
मनोयोग से जुट जाते हैं! !इस तरह से धर्म की धारणा भी सिद्ध नहीं होती है
!और इन धार्मिक आयोजनो का खामयाजा आम जनता भ्रष्ट आचरण के रूप में सहन करने
की लिए बाध्य होती है !भगवान श्री कृष्णा ने गीता १८(४५,४६)में भगवान की
प्राप्ति का साधन बताते हुए धार्मिक धारणा कोधारण करने के लिए कहा है !कि
अपने अपने कर्तव्य कर्मों में लगा हुआ मनुष्य परमात्मा को प्राप्त कर लेता
है !अपने कर्तव्य कर्मों को करता हुआ मनुष्य जिस प्रकार सिद्धि को प्राप्त
होता है उस प्रकार को तू मुझ से सुन! जिस परमात्मा से संपूर्ण प्राणियों की
उत्पत्ति होती है! और जिस परमात्मा से यह सम्पूर्ण संसार व्याप्त है! उस
परमात्मा का अपने कर्तव्य कर्म के द्वारा पूजन करके मनुष्य मात्र सिद्धि को
प्राप्त हो जाता है !अगर देश के नेता अधिकारी कर्मचारी कथावाचक धार्मिक
आयोजक अगर इस उपदेश का पालन करें तो उनको भी भगवान का आशीर्वाद प्राप्त
होगा! और आम जनता को टूटी फूटी सड़कों और भयानक भ्रष्टाचार से मुक्ति मिलेगी
!
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