सत्ता की होड़ में लगे हुए नेताओं को इस बात का यह्सस नहीं है की भविष्य में
इस बात पर उनका मुल्यांकन नहीं किया जाएगा की उन्होंने डॉ अम्बेडकर की
जयंती कितनी धूम धाम से मनाई थी!या जब ये नेता लोग डॉ आंबेडकर की मूर्ति को
माला पहना रहे थे या उनकी जिंदाबाद बोल रहे थे या पुष्पों की वर्षा कर
उनका गुण गान कर रहे थे !और ये नेता लोग किस राजनैतिक पार्टी के सदस्य
पदाधिकारी या मंत्री मुख्यमंत्री थे !इन नेताओं का मुल्यांकन इनके कार्योँ
से होगा नेताओं का त्याग उद्द्यम ईमानदारी और चरित्र की शुद्धता
से ही नेताओं का मुल्यांकन होगा !जनता यह जानना चाहेगी की वास्तव में
इन्होने आंबेडकर के आदर्शों को अपनाकर लोकतंत्र को कितना उपयोगी और सार्थक
संविधान के अनुसार बनाया !अगर नेता लोग यह नहीं करेंगे और जनता के मौजूदा
दुःख और अशंतोष से लाभ उठाकरउस से अपना स्वार्थ सिद्ध करेंगे ,अपनी धन
संपत्ति की बृद्धि करेंगे और अपनी सत्ता और कुर्सी पर पकड़ मजबूत करेंगे और
सत्ताका दुरूपयोग करेंगे जनता को अपनी सत्ता की आकांछा की प्राप्ति का
माध्यम बनाएंगे तो जनता का यह दुःख और अशंतोष कभी न कभी पलट कर इन्ही
नेताओं के सर पर पढ़ेगा और जनता से इस विश्वास घात के लिए न इन्हे भगवान माफ़
करेंगे और न आंबेडकर छमा करेंगे ! ये नेता लोग स्वार्थ के कारण अंधे हो गए
हैं और इनके द्वारा खुद भ्रष्टाचार होता है और इन्ही के संरक्छण में
अधिकारी कर्मचारी आदि भी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं !फिर भी ये बाबा साहेब
अम्बेडकर का स्तुति गान सत्ता की पप्ति के लिए कर रहे है !
No comments:
Post a Comment