उच्च्तम न्यायालय के मुख्या न्यायाधीश का मुकददमों के शीघ्र निस्तारण के सम्बन्ध में न्यायाधीशों के अभाव की चर्चा करते हुए भावुक हो जाना !यह उनकी वादकारियों के प्रति तीव्र वेदना की अभिव्यक्ति प्रदर्शित करती है! न्याय प्राप्ति में विलम्ब के अनेक कारण है !इन कारणों के पीछे सबसे महत्त्व पूर्ण कारण लोगों का अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करने का अभाव है !दो प्रकार के मुकदद्मे न्यायालय में पेश होते है ----- १ ---- आपराधिक मुकदद्मे जिनमे अधिकाँश में शाशन वादी होता है ! २------ दीवानी ,माल ,और व्यक्तिगत आपराधिक मामले जिनमे अधिकाँश में पीड़ित व्यक्ति स्वयं वादी होते हैं ! न्यायालय में इन सभी प्रकार के मुकददमों के निस्तारण में अधिवक्ताओं ,न्यायालय के कर्मचारियों ,और न्यायाधीशों की विशेष भूमिका होती है !अधिवक्ता कभी भी किसी भी समय हड़ताल कर देते हैं !मुकददमों के सुनबाई में भी अधिवक्ताओं की प्रमुख भूमिका होती है !न्यायाधीश चाहकर भी अधिवक्ताओं की हड़ताल या उनके दूवारा दिए गए प्रकरण की सुनबाई स्थगित करने के प्रार्थना पत्र के बाद सुनबाई नहीं कर सकते हैं !इसके अलावा भ्रष्टाचार भी न्याय प्राप्ति के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है !धन कमाने की असीमित आकांछा ने लोगों को भ्रष्टाचार की अँधेरी कोठरी में प्रवेश करा दिया है !जिस से बाहर आने की इक्छा भ्रष्ट लोगों की नहीं है ! फिलहाल लोगों की कर्त्तव्य निष्ठां के अभाव के कारण अभी किसी भी प्रकार के न्यायिक समाधान की सम्भावना नहीं है !
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