भूकम्प से ज्यादा तबाही हिमालय छेत्र में स्थित नेपाल में हुई और थोड़ी बहुत
तबाही भारत में भी हुई ! भकंप को वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों कारणों से
देखा जाना चाहिए !धर्म के पांच चरण होते हैं श्रद्धा ,सत्य ,प्रेम , करुणा
और त्याग !इनमे श्रद्धा तो धार्मिक लोगों में दिखाई देती है !किन्तु बाकी
चार चरणो का दर्शन नहीं होता है !हिन्दुओं के आयोजनो में श्री मद भगवत
रामायण कथा और यज्ञ आदि आयोजनो के कार्यक्रम प्रधानता से होतेहैं !भगवत ७
दिनों में मोक्ष मार्ग बताने वाला ग्रन्थ है !रामायण दैनिक
व्योहार में मर्यादा पालन की बात कहती है और यज्ञ पारमार्थिक जीवन जीने की
विद्या बतात है !किन्तु भगवत की कथा में भगवत नहीं होती है !भजनो गीतों
आडम्बरों की भरमार होती है !भगवत कराने वाले अनीति अनैकित्ता और बालू मिटटी
गिट्टी ज़मीन खोद कर उसको पोलाकर और ब्रक्छ काटकर पर्यावरण का विनाश करने
बाले और जोर जबर्दश्ती से लोकतान्त्रिक व्यबश्था को नष्ट करने वाले तथा
शराब के व्योपारी आदि होते हैं!और कथा वाचक भी बहुत ऊँचे किस्म के ऊँची
दक्छिणा पर भगवत की कथा कहते हैं !इस प्रकार भगवत का मोक्ष का सिद्धांत
आयोजक और कथा बाचक भोग में बदल देते हैं और आयोजक गण आशीर्वाद प्राप्त कर
पूरी शक्ति से फिर अपने पुराने धन्दों में लग जाते हैं !यही हाल रामायण कथा
का होता है ! यज्ञ का तो पारमार्थिक उद्देश्य और बिधि तथा पवित्रता का ही
नाश हो गया है !क्रिकेट की जीत चुनाव में नेताओं की विजय बुद्धि शुद्धि
यज्ञ आदि बिना पवित्रता और विधि विधान के सम्पन्न किये जाते हैं !कुछ
यज्ञों में गुरूजी के चित्रों को देवताओं से ज्यादा महत्त्व दिया जाता है
!कुछ धार्मिक कार्य सिर्फ नेताओं और अधिकारिओं को प्रसन्न करने के लिए किये
जाते हैं !इसलिए इस प्रकार के आयोजनो के भयंकर परिणाम भी श्रद्धालुओं की
मौत के रूप में सामने आते हैं !मुसलमानो के ईद आदि के जलसों में तलवारों की
भरमार होती है !और नमाज में शांति और सद्भाव की कामना की जाती है !और कभी
कभी तो यह देखने में आता है कि नवाज के बाद मुसलमान और उग्र हो कर भयंकर
खून खराबी और तोड़ फोड़ करते पाये जाते हैं!इस प्रकार सार रूप मेसभी धर्म
त्याग प्रेम करुणा और सत्य का सन्देश ना देकर हिंसा शोषण अनीति अत्याचार
भ्रष्टाचार और मानवता के विरुद्ध और पर्यावरण के नाशक हो गए हैं !और परिणाम
में अभी का भूकम्प आया है ! और भविष्य के भूकम्प जनता के सामने आएंगे और
आते रहेंगे !हम सुधरेंगे नहीं इसीलिए प्रकृति का प्रकोप होता रहेगा!
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