Wednesday, 27 April 2016

आजाद भारत में लोगों ने रूपया को ही लक्ष्मी समझने की भूल की !जबकि रूपया तो नासिक में छपता है और लक्ष्मी मनुष्योँ के परिश्रम और भूमि ,वनस्पति पशुओं ,और अन्य जीव धारियों के सक्रिय सहयोग से उत्पन्न होती है !रुपये को लक्ष्मी समझ कर धन बृद्धि की वासना से ग्रस्त लोगों ने ब्रक्छों को काटना भूमि को खोद कर उसमे से खनिज पदार्थ निकलना पहाड़ों को तोड़कर गट्टी निकालना दूध देने वाले पशुओं गाय आदि को मार कर उनके मांश का भक्छण कर उनके मांश का निर्यात करना ,नदियोँ की बालू निकालना और भूखंडों पर नियम विरुद्ध बड़े बड़े भवन निर्माण करना आदि से देश का पर्यावरण पूरी तरह से दूषित हो गया !और देश में असमय वारिश और भूकम्प आदि की सम्भावना पूरी तरह से बढ़ा दी !तथा रूपया कमाने और संग्रह करने की होड़ में नेता अभिनेता अधिकारी कर्मचारी अधिवक्ता व्योपारी धर्माचारी आदि सभी शामिल हो गए !और सारे देश में अकर्मण्यता रिश्वत खोरी कामचोरी बेईमानी आदि का बाहुल्य हो गया !आज रूपया लोगों के पास आवश्यकता से बहुत अधिक है !किन्तु बाजारों में जहरीला खाद्द्यान्न चर्वी से बना हुआ घी चेमिकल्स और हानिकारक अशुद्ध वस्तुओं से बने हुए दूध पनीर मक्खन आदि तथा नकली मसाले .नकली खाद जहरीले फल सब्जी आदि तथा नकली दवाइयाँ फर्जी डिग्रियां आदि की ही बाजारों में भरमार है ! और सबसे बड़ा मनुष्यता के समूल नाश का खतरा भूकम्प भी उत्पन्न हो गया है !इसीलिए अगर मनुष्य यह चाहता है की प्राणी मात्र का असितत्त्व नष्ट न हो और लोगों को शुद्ध स्वास्थ्य वर्धक सामग्री की प्राप्ति हो तो उसे लक्ष्मी को प्राथमिकता रुपये के स्थान पर देनी होगी !भूमि से अन्न पशुओं से दूध घी मक्खन आदि कपास की उपज से वस्त्र आदि का साधन बनाना होगा ! और जल .वायु की शुद्धता के लिए जहरीली गैसें छोड़ने वाली फैक्टरियों और भूमि की रक्षा के लिए सभी प्रकार के अवैध खनन और वर्षा तथा पर्यावरण की शुद्धि के लिए ब्रक्छों की अवैध कटानो को रोना होगा और इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर करना होगा !तभी सबका जीवन सुरक्छित रहेगा

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