Friday, 22 April 2016

सत्य बोलना अत्युत्तम है !इसकी महिमा वैदिक धर्म ग्रंथों में गयी गयी है !गांधी जी पहले मानते थे ईश्वर सत्य है !किन्तु ईश्वर की साधना से उनको आत्मानुभव हुआ की सत्य ही ईश्वर है ! उन्होंने सत्य अहिंसा को अपने जीवन की समस्त क्रियाओं यहाँ तक की राजनैतिक गतिविधियों को भी सत्य अहिंसा का आधार दिया था !वह कहते थे !कि अंतर बाह्य जीवन की पूर्ण शुचिता और शुद्धि ही अहिंसा है !और बिना सत्य के अहिंसा की प्राप्ति नहीं हो सकती है !किन्तु व्योहार जगत में सत्य के आंतरिक मर्म को समझ कर उसका उपयोग करना पड़ता है !महाभारत में एक प्रसंग में कहा गया है !की जिसकर्म के परिणाम में लोक कल्याण हो और हिंसा न हो वही सत्य है !और जिस शव्दिक सत्य के कथन से हिंसा हो वहां शव्दिक झूठ भी सत्य ही होता है !भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को एक सत्यवादी मुनि की कथा सुनाते हुए कहा था !की एक मुनि थे जो सदा सत्य बोलते थे और सत्यबादी के नाम से ही जाने जाते थे !एक बार कुछ डाँकू एक सेठ का पीछा कर रहे थे !और वह सेठ उन सत्य वादी मुनि के आश्रम के पास ही ब्रक्छों झाड़ियों की ओट में छिपा हुआ था !डाकुओं ने मुनि से सेठ का पता पूंछा और मुनि ने सेठ का सत्य बोलकर पता बता दिया !परिणाम स्वरुप डाकुओं ने सेठ को लूटकर उसकी हत्या कर दी ! इस शाब्दिक सत्य के कारण मुनि को मृत्यु के बाद नर्क की प्राप्ति हुई! जिस शव्दिक सत्य के परिणाम में हिंसा होती हो वहां मौन रहना ही सत्य है !और यदि मजबूर होकर बोलना ही पड़े तो प्राण रक्छा के लिए वहां झूठ बोलना ही सत्य के समान श्रेयष्कर है ! शाब्दिक सत्य कभी झूठ से भी ज्यादा अपराध करने का साधन बनाया जा सकता है !विनोबा भावे एक उदहारण से इस बात को समझाते थे !दो चोर थे और दोनों ही सत्य बादी थे !उन्होंने एक बार मिठाई बेचने वाले की दूकान से जब वह चोरों को पिलाने के लिए दुकांके अंदर पानी लेने गया था उनमे से एक चोर ने उसके पेड़े चोरी कर दूसरे चोर को दे दिए !जब मिठाई वाले ने पूंछा की तुमने पेड़े चुराए हैं तो जिस चोर के पास पेड़े थे उसने कहा हम लोग कभी झूठ नहीं बोलते हैं !पेड़े मेने नहीं चुराए है !और जिसने पेड़े चुराए थे उसने कहा पेड़े मेरे पास नहीं है !इस प्रकार चोरों ने अपने शव्दिक सत्य से चोरी के अपराध की सुरक्छा की !इसलिए वास्तविक सत्य अंतर से उत्पन्न लोक हित और प्रमाणिकता की भावना से श्रेष्ठ कार्य और साधारण कार्य की प्रमाणिकता के लिए उत्पन्न होना चाहिए !और उसकी अभिव्यक्ति शव्दों मेंहै ! होनी चाहिए !जिस सत्य से जीव हत्या न होती हो और परिणाम में लोक कल्याण का हित होता हो !वह भी सत्य ही है !

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