सिद्ध योगी में चमत्कारिक दिव्य शक्तियों का उदय हो जाता है !किन्तु वह योग
से प्राप्त सिद्धियों से भौतिक समृद्धि नाम धन की प्राप्ति तथा तथा काम
जनित वासनाओं की तृप्ति के लिए नहीं करता है १ भोग बुद्धि से संग्रह न करने
वाळा इक्छा रहित और अंतःकरण को बश में रखने वाळा योगी अकेला एकांत में
स्थित होकर मन को निरंतर परमात्मा में लगाता है ! ध्यान योग का अधिकारी वह
है जो अपने शारीरिक सुख भोगों की अपने मन में कामना नहीं रखता है !ध्यान
योग के साधक का उद्देश्य केवल परमात्मा को प्राप्त करने का
ही हो लौकिक सिद्धियों को प्राप्त करने का नहीं !ये तथाकथित योगी योग से
अल्पशक्ति प्राप्त कर जो भोग से संतप्त और अत्यधिक भोगों से जन्मी शरीरूिक
मानसिक व्यधिओं से ग्रस्त होकर मानसिक शांति और शारीरिक स्वास्थ्य खो चुके
हैं !उनसे योग की बहिरंग क्रियाएँ आसान प्राणायाम आदि को करवाते है !और
उनसे धन प्राप्त कर अकूत संपत्ति का संग्रह कर अत्यधिक विलासता पूर्ण जीवन
जीते हैं बड़ी बड़ी विलासता युक्त कारों में यात्रा करते हैं और महिलाओं के
संग साथ में रह कर उनसे यौन सम्बन्ध भी कायम करते है !कभी किन्ही महिलाओं
से सम्बन्ध सहमति से भी होते हैं !किन्तु काम जनित वासना से ग्रसित ये
भ्रष्ट योगी कभी कभी बलात्कार से भी अपनी काम तृप्ति करते हैं ! उसके
परिणाम में फिर बलात्कार के मुकदद्मे उनके विरुद्ध दायर होते है !और फिर
जेल में सड़ते हैं !यह दंड उनको उनके पापकर्मों से और परमात्मा के साथ धोखा
धडी करने के कारण प्राप्त होता है !यह भ्रष्ट योगी भी अपने दुष्कर्म का फल
भोग रहा है !और पश्चिमी संस्कृति को दोष दे रहा है !योग को भोग का साधन बना
कर भारतीय योग की परम्परा का नाश करने वाले इन योगिओं को परमात्मा की और
से अवश्य दंड प्राप्त होता ही है !
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