Monday, 16 November 2015

लाला लाजपत राय उन देश भक्तों में थे !जिनके दिल दिमाग में देश की आजादी के साथ भारत के भविष्य के नव निर्माण की भी कल्पना और योजनाएं थी ! ब्रिटिश पार्लियामेंट  में भारतीय सांसद दादा भाई नौरोजी और स्वंत्रता संग्राम सेनानी  लाला जी ने भारत का आर्थिक सर्वे कर ब्रिटिश शाशन में  हुई भारत की आर्थिक अवनति का यथार्थ चित्रण प्रस्तुत किया था ! लालाजी ऐसे देश भक्तों का पुण्य स्मरण तो देशबासी करते हैं !किन्तु उन्होंने जो आदर्श अपनी सुख सुविधाओं और जीवन को बलिदान कर प्रस्तुत किया है !उसका अनुपालन देश में न तो राजनैतिक जीवन में और ना सामाजिक, शैक्छिक ,न्याय और मीडिया आदि के छेत्रों में भी नहीं दिखाई देता है !परतंत्र  भारत में स्वतंत्रता के संवाहकों में त्याग की हबा तीब्र गति से बाह रही थी !स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए समर्पित सभी गांधीवादी अहिंसक और भगत सिंह आदि के क्रांतिकारी मार्ग का अनुसरण करने वाले सभी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अपने जीवन को और सभी सुख सुविधाओं को बलिदान करने के लिए उत्साहित रहते थे !और उनकी सम्पूर्ण प्रितस्पर्धा देश के लिए सर्वस्व त्याग की थी !किन्तु आजाद भारत में अब प्रति स्पर्धा  का स्वरुप त्याग और बलिदान की बजाय भोग का हो गया है !आज की प्रतिस्पर्धा सभी साधनो से धन संपत्ति ,एवं पद प्रतिष्ठा प्राप्ति की है !और इसके लिए हम लोग लोकतान्त्रिक व्यबस्था की भी बलि देने को तैयार दिखाई देते हैं !अब लोग त्याग तपस्या राष्ट्र प्रेम आदि की प्रशंशा शव्दों में तो करते हैं !लाला लाजपत राय ऐसे देश भक्तों का स्मरण भी करते हैं !उनकी स्मृति में श्रद्धा सुमन भी अर्पित करते हैं !किन्तु उनकी त्याग तपस्या और देश भक्ति की विरासत को थोड़ा सा भी अपने जीवन में उतारने का प्रयत्न नहीं करते हैं ! आजाद भारत में देश वासियों को लाला लाजपत राय जैसा जीवन बलिदान न ही करना है !अब उनकी स्मृति को सामाजिक  जीवन में उतारने के लिए !सिर्फ हम जहाँ भी है !और जिस छेत्र में भी कर्मरत हैं !वहां रहकर  अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करने से ही इन देशभक्तों की विरासत की पूर्णता की प्राप्ति हो जायेगी

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