Friday, 13 November 2015

नेहरू का मूल्यांकन ---------- इस समय देश में नेहरू की घोर विरोधी सरकार केंद्र में बैठी हुई है ! इसीलिए देश के प्रमुख समाचार पत्रों में नेहरू जी के मूल्यांकन के सम्बन्ध में तटस्थ और निष्पक्छ मूल्यांकन की आशा नहीं की जा सकती है !जो कांग्रेसी विचार की पोषक पत्रिकाएं या समाचार पत्र हैं !बे भी नेहरूजी का निष्पक्छ मूल्यांकन प्रस्तुत नहीं करेंगे !राजनैतिक नेताओं के मूल्यांकन तो राजनैतिक दृष्टि से ही किये जाते हैं !इसीलिए इन मूल्यांकनों का प्रमुख उद्देश्य राजनैतिक लाभ और हानि का ही रहता है !फिर भी नेहरूजी ऐसे महान पुरुषों के बारे में गैर राजनैतिक दृष्टि से भी विचार जो राजनीति से प्रेरित नहीं है ! उनके द्वारा किया जा सकता है !और जरूर ऐसा किया भी जा रहा होगा !जब से केंद्र में भाजपा की सरकार आई है !तब से विशेष तौर पर भाजपा  के द्वारा सरदार पटेल को प्रधान मंत्री न बनाये जाने और उनकी उपेक्छा के लिए नेहरूजी को प्रत्यक्छ और अप्रत्यक्छ रूप से जिम्मेदार ठहराया जा रहा है !और इसी आवाज को बुलंद भाजपा के सभी छोटे मोटे नेता भी  कर रहे हैं !पटेल की इस प्रसंशा के पीछे भी राजनैतिक लाभ की ही आकांछा बलवती मालूम पड़ती है !अगर ऐसा न होता तो नेहरू जी पर अनावश्यक आरोप लगाने वाले ये लोग इस सम्बन्ध में सही तथ्य अवश्य प्रस्तुत करते !१९४६ में देश में केंद्र में अंतरिम सरकार की रचना हुई तभी  से सरदार के कन्धों पर गृह मंत्री की भारी से भारी जिम्मेदारी आई सरदार के सर पर कार्य का अपार बोझ था ! उनका स्वास्थ्य इस विकट जिम्मेदारी का निर्बहन करते करते करते बुरी तरह बिगड़ गया था !उनका स्वास्थ्य आजादी की लड़ाई केदौरान भी ठीक नहीं रहा था !बे बार बार पर अश्वस्थ हो जाते थे !गांधी जी उनके स्वास्थ्य को लेकर विशेष तौर पर चिंतितरहते थे !अश्वस्थ रहते हुए भी उन्होंने देश की ६५० रियासतों  का विलय किया ! उन्होंने गृह मंत्री पद पर ४साल कार्य किया ! किन्तु हृदय रोग के कारण अपने कार्यकाल के दो साल उन्होंने अस्पताल में रहकर ही चलाये ! उनका ह्रदय रोग लगातार बढ़ता गया डॉक्टरों ने  उन्हें सलाह दी थी ! कि दिल्ली की प्रतिकूल जलवायु और वातावरण से मुक्त होकर बम्बई जाएँ इसलिए १५--१२--१९५० को उन्हें बम्बई ले जाया गया ! सरदार को अपनी मृत्यु का आभास हो गया था ! उन्होंने अपने एक मित्र से कहा था कि अब मेरे जीवन का अंत आ रहा है ! १५--१२--१९५० को बम्बई  में उनका निधन हो गया था !इस तथ्य की चर्चा कभी भी ये राजनैतिक लाभ से ग्रस्त व्यक्ति कभी नहीं करते हैं !यह बात सत्य है !कि नेहरूजी और पटेल में वैचारिक मतभेद थे !किन्तु इन वैचारिक मत भेदों में उनके स्नेह में कभी कमी नहीं आई थी !दोनों ही महान पुरुष थे !और पद लोलुप नहीं थे !तथा अपने राजनैतिक पदों से ज्यादा ऊँचे थे !३० जनबरी १९४८ को जिस दिन गांधी जी शहीद हुए ४बजे सरदार अपनी पुत्री के साथ गांधी जी से मिलने पहुंचे थे ! और उनसे गांधीजी की एक घंटे से अधिक बात चीत हुई थी ! गांधी जी ने सरदार से कहा था कि यद्द्पि मेने पहले विचार प्रगट किया था कि तुमको या जवाहर को मंत्रिमंडल से हट जाने को कहूँ ! किन्तु अब में निश्चित तौर पर इस नतीजे पर पहुंचा हूँ  ! कि दोनों का मंत्रिमंडल में रहना अनिवार्य है ! आप दोनों में जरा सी भी फूट इस स्थिति में विनाशकारी सिद्ध होगी ! में इस विषय पर आज अपनी प्रार्थना सभा में बोलूंगा ! और नेहरू मुझ से प्रार्थना सभा के बाद मिलेंगे तब उनसे भी यही बात कहूंगा !किन्तु गांधी जी प्रार्थना सभा के पूर्व ही मार  दिए गए थे !!सरदार और नेहरू के बीच विचारधारा का संघर्श गांधी जी के निधन के बाद भी चलता रहा किन्तु नेहरू के प्रति बुनियादी बफादारी में रत्ती भर फर्क नहीं आया ! २ अक्टुबर  १९५० को सरदार पटेल ने इंदौर में  भासण में कहा था ! कि हमारे नेता पंडित जवाहर लाल नेहरू हैं ! गांधीजी ने अपने जीवन काल में उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था ! गांधीजी के सभी सिपाहियों का यह धर्म है ! कि बे उनके आदेश का पालन करें  ! जो गांधी जी के आदेश का ह्रदय से पालन नहीं करेगा वह ईश्वर के सामने पापी सिद्ध होगा ! में बेवफा सिपाही नहीं हूँ  ! में जिस स्थान पर हूँ वहीं ठीक हूँ  ! में इतना ही जानता हूँ कि जहाँ बापू ने मुझे रखा था वही अब भी में हूँ ! महान देश भक्त सरदार पटेल को सत्ता प्राप्ति का मोहरा बनाकर या सत्ता में बने रहने का आधार बनाकर मनगढंत व्यानबाजी करना सरदार का अपमान करना है !सत्ता समुद्र में उठती गिरती तरंगो की तरह है !इसको सभी राजनैतिक नेताओं को ध्यान में रखना चाहिए !आज नेहरूजी पर धर्म निर्पेक्छ्ता को लेकर उनको हिन्दू धर्म के विध्वंसक के रूप में और उनपर जो चारित्रिक पतन के बे बुनियाद हमले किये जा रहे हैं !बे सही नहीं है !नेहरूजी की देश भक्ति  और समाजवादी विचार के प्रति प्रतिबद्धता, लोकतान्त्रिक भाबना उत्कृष्ट ईमानदारी और देश को उन्नति की ओर ले जाने के लिए उनकी असाधारण कर्मनिष्ठा आदि गुणों को धारण करने की आवश्यकता है !जिसका लोप आज की राजनीति में तेजी से होता दिखाई दे रहा है !

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