Sunday, 15 November 2015

आत्तंकवाद मीडिया की जिम्मेदारी ------यूरोपियन मीडिया और भारत की मीडिया में वैसा ही फर्क है! जैसा यहाँ की राजनीति और यूरोपियन देशों की राजनीति में है !भारत ने लगभग १२०० साल की गुलामी के बाद आजादी प्राप्त की है !और आजादी की बड़ी भारी कीमत देश के बिभाजन के रूप में चुकाई है !जिस धार्मिक आधार पर देश का विभाजन हुआ !और लाखों लोगों को अपनी जन्मभूमि से पलायन करना पड़ा और लाखों लोगों की हत्याएं हुई उसके बाद भी देश में हिन्दू मुसलिम में सद्भाव कायम नहीं हो सका !आज भी इन दोनों धर्मों में दंगे और फसाद आये दिन होते ही रहते हैं !देश में अभी भी स्वतंत्र राष्ट्रीय चेतना के दर्शन न मीडिया में होते  है !और ना राजनेताओं में होता है !मीडिया सत्ता धारी दल के नेताओं के आँख मीच कर समर्थन करती है !और सत्ता धारी दल के नेता सत्ता में बने रहने के लिए मीडिया के उपयोग करते हैं !इन दोनों के गठ बंधन के कारण  आत्तंकवादी घटनाओं जैसी गंभीर ,दर्दनाक और क्रूरता  की हद तक अमानवीय घटनाओं पर भी मीडिया की निष्पक्छ समाधानकारक राय प्रगट नहीं होती है !जब कोई अत्तंकवादी हिंसक घटना घटती है !तो विपक्छ के नेता सरकार से त्यागपत्र कीमाँग करते है !और मीडिया राजनेताओं के सुर में सुर मिलाकर आत्तंकवाद के बास्तविक समाधान परक वक्तव्य देने के बजाय यह कहना शुरू कर देती है !की आत्तंक वादियों का कोई धर्म नहीं होता है !और अत्तंकवाद के सहयोगी किसी व्यक्ति को पुलिस पकड़ती है !कुछ लोग जोर शोर से हल्ला मचाना शुरू कर देते हैं !कि अल्पसंख्यकों को झूठा फसाया जा रहा है !आत्तंकवाद की समस्या अधर में लटकी रह  जाती है !किन्तु पश्चिमी देशों में  इस तरह की बेतरतीब व्यान बाजी ना तो नेताओं के तरफ से होती है !और ना ही मीडिया  सही रपोर्टिंग करने से कतराती है !मीडिया और राजनेता सभी एकस्वर से देश की रक्छा और आत्तंकवाद के विरुद्ध खड़े हो जाते हैं !पेरिस में जो आत्तंकवादी घटना घटी है !उसके साथ सारा देश और मीडया साकार के साथ खड़ा हुआ है !किन्तु भारत के एक मंत्री आजमखान ओए उच्चतम न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश आत्तंकवादियों के समर्थन में व्यान बाजी करते दिखाई दे रहे हैं !जब तक देश में धार्मिक ,जातीय भेद भौं का विलीनी करण राष्ट्रिय भाव में नहीं बदलता तब तक भारत आत्तंकवाद के विरुद्ध पश्चिमी देशों की तरह एक जुट होकर भारत खड़ा नहीं हो सकता है !मीडिया अगर निर्भयता पूर्वक आत्तंकवाद के विरुद्ध अपनी राय प्रगट करे तो देश में ऐसा जनमत तैयार किया जा सकता है !जो अत्तंकवाद के सफाये में मददगार हो सकता है !

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