धर्म से बहुत से लाभ भी हैं ! और नुक्सान भी है !जब धर्म कटटरता और चरमपंथ का रूप ग्रहण कर लेता है तब वह धर्म नहीं रहजाता है !अधर्म जो जाता है !धर्म से दो धाराएं निकलती हैं !एक अधर्म की और दूसरी अध्यात्म की !भारत में जिस वैदिक धर्म का जन्म हुआ उसने धर्म से अध्यात्म की और गति करने को ही स्वीकार किया !यह एक ऐसा धर्म है जिसमे चरम पंथ को कोई स्थान नहीं है !वैदिक धर्म के आदि ग्रन्थ वेदों में विश्व मानव शव्द आया है !तथा यह कहा गया है !आनो भद्रा क्रतवो यन्तु विश्वतः (सारे विश्व से अच्छे विचार आएं )ऋषि कहते हैं !सर्वे भवन्तु सुखिनः ,!सर्वे सन्तु निरामह !माँ कश्चिद् दुःख भाव भवेद !(सारे प्राणी सुखी और रोग मुक्त हौं किसी को भी दुःख की प्राप्ति न हो ) गीता में कहा गया है अध्यात्म निष्ठ व्यक्ति सभी प्राणियों को अपने में देखता है और अपने ही तरह सबके दुःख निवारण का प्रयत्न करता है और सबको सुख प्रदान करता है !इस दृष्टि को समझ कर धारण करने वाले व्यक्ति किसी भी धर्म के मान ने वाले हौं !बे आध्यात्मिक ही होते हैं !और समाज ऐसे ही व्यक्तियों से प्रेरणा प्राप्तकर धार्मिक संकीर्णता से मुक्त होता है !शवाना आजमी और उनके पति जावेद अख्तर इसी कोटि के आध्यात्मिक पति पत्नी है ! उनकी पहचान भले ही मुसलिम के रूप में हो !किन्तु बे सभी प्रकार की धर्मगत और जातिगत संकीर्णताओं से पूरी तरह मुक्त है !वैदिक धर्म का प्रत्यक्छ आचरण उनके शव्दों में और कार्यव्योहार में स्पष्ट दिखाई देता है
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