जो साहित्यकार और लेखक पुरुष्कार लौटा रहे हैं !और जो साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने के लिए गैर जिम्मेदार व्यान बाजी कर रहे हैं !तथा जो राजनेता राजनैतिक हित साधन को ध्यान में रख कर साहित्यकारों के पुरुष्कार लौटाने का अन्ध समर्थन कर प्रधान मंत्री के विरद्ध व्यान बाजी कर उन पर असहष्णिता फैलाने और बढ़ाने का आरोप लगा रहे हैं !ये सब किसी ना किसी रूप में देश में सद्भाव बिगाड़ने और असहन शीलता बढ़ाने का काम कर रहे हैं !साहित्यकारों और लेखकों को पुरुष्कार लौटने के बजाय असहन शीलता का लेखों के द्वारा सामूहिक विरोध व्यक्त करना चाहिए था !तथा जनता के सामने अपना विरोध का पक्छ रखना चाहिए था !तथा असहन शीलता ना पनपे उसके लिए और उसके निवारण के ठोस उपाय भी प्रस्तुत करने चाहिए थे !तथा सरकार से भी सार्थक बात चीत करनी चाहिए थी !यदि इस सबके बाद भी सरकार न सुनती और कोई सही समाधान ना निकलता ! तब उनको पुरुष्कार लौटाना चाहिए था !इस प्रकार पुरुष्कार लौटा कर बे अनजाने में ही भाजपा विरोधी राजनैतिक दलों के समर्थक बन गए हैं !जो केंद्र सरकार और भाजपा सरकारों के मंत्री और सांसद तथा कार्यकर्ता जो मुसलमानो के विरुद्ध अनर्गल व्यान बाजी करते रहते हैं !यह भी उचित नहीं है !इस से केंद्र सरकार के विरुद्ध अनावश्यक वाताबरण बनता है !और प्रधान मंत्री पर असहन शीलता को बढ़ाने का आरोप लगता है !जो राजनैतिक दल प्रधान मंत्री को कट घरे में खड़ा कर रहे हैं !बे यह काम तो भाजपा के विरुद्ध हमेशा करते रहे हैं !भाजपा का जन्म ही कांग्रेस की नीतियों के विरुद्ध हुआ था !इसलिए देश में भाजपा एक मात्र ऐसा राजनैतिक दल है जिसका निर्माण कांग्रेस से टूट कर नहीं हुआ है !भाजपा की स्थापना एक विशेष प्रकार की राजनैतिक व्यबस्था देश में निर्माण करने के लिए हुई है !जबकि देश के अन्य सभी राजनैतिक दलों केनेता किसी ना किसी रूप में कांग्रेस से सम्बद्ध रहे हैं !और इन राजनैतिक दलों के नीति और कार्यक्रम भी कांग्रेस से मिलते जुलते हैं !इसीलिए ये दल कभी भी भाजपा सरकार की नीतियों के अनुगामी नहीं हो सकते हैं !भाजपा जब इसका नाम भारतीय जनसंघ था ! तब से हिन्दू विचार धरा की समर्थक रही है !सत्ता में आने के बाद उसने हिंदुत्तव के बहुत से मुद्दे छोड़ दिए हैं !अभी सिर्फ राजनेताओं की व्यान बाजी पर ही देश में असहन शीलता की बृद्धि का आरोप लग रहा है !और कहा जा रहा है !कि देश का साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ा जा रहा है !जब भाजपा अपना चिरपोषित हिन्दू एजेंडा देश में लागू करने का प्रयत्न करेगी !तब क्या होगा ? देश में सम्वैधानिक शाशन व्यबस्था है !संवेधानिक प्रावधानों के विधि सम्मत प्रावधानों की रक्छा करने के लिए स्वतंत्र और निष्पक्छ न्याय पालिका है !इसिलिय अगर कोई कार्य या वक्तव्य देश में असहन शीलता को बढ़ाबा दे रहा है !तो राजनेताओं को व्यान बाजी करने और साहित्यकारों को पुरुष्कार लौटाने के बजाय न्यायालय में जाना चाहिए !और वहां से जो निर्णय होगा उसको सरकार को लागु करना ही पड़ेगा !और यही देश हित में भी है !किन्तु यह ना करने के स्थान पर व्यान बाजी कर और पुरुष्कार लौटा कर देश में ये भी असहन शीलता की ही बृद्धि कर रहे हैं !
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