भारत की १००० साल से अधिक की गुलामी ने देश में अनेक विकृतियों कोजन्म दिया है !इन विकृतियों से मुक्त हो पाने के लिए गुलाम भारत में भी अनेक प्रयत्न देश भक्तों ने किये !किन्तु अभी भी बहुत कछ करना बाकी है !भारत की मूल अवधारणा विचार से विचार को काटने की रही है !इस देश में कभी भी विचार को तलवार से काटने की परम्परा नहीं रही है !२५०० साल पहले वैदिक धर्म के अंग के रूप में बौद्ध धर्म का उदय हुआ है !भगवान बुद्ध ने वैदिक धर्म में सुधार के लिए जो अनेक आख्यान प्रस्तुत किये !और धार्मिक हिंसा का निषेध किया तथा बर्णाश्रम धर्म की जो कर्म पर आधारित व्याख्या की !वह उनके समाधिस्थ होने के बाद देश में बौद्ध धर्म के नाम से स्थापित हुई !उनके जीवन काल में अनेक राजाओं ने उनसे दीक्छा ली और हिंसा का परित्याग किया !इस बदलाव में कहीं भी तलवार का प्रयोग नहीं हुआ !सिर्फ विचार से ही विचार को काटा गया !आज बुध धर्म का प्रभाव भारत से अधिक अन्य देशों चीन विएतनाम थाईलैंड वर्मा ,श्री लंका आदि देशों में देखा जाता है !किन्तु बुद्ध की मूल अहिंसक प्रवृति का दर्शन भारत में तो होता है !किन्तु भारत से बहार के देशों में बौद्ध धर्म के अहिंसक स्वरुप का दर्शन नहीं होता है !इसका मुख्य कारण यह है !कि भारत स्वाभाव से ही अहिंसक और करुणा प्रधान देश रहा है !और आज भी है !सनातन धर्म ने कभी भी दूसरे धर्मो का अनादर नहीं किया !भारत में जो ईसाई धर्म और इस्लाम का प्रवेश हुआ !उसमे बहुत से सनातन धर्मियों का प्रवेश हुआ !भारत के मुसलमानो और ईसाइयों के रंग रूप कद और काठी सभी यहाँ के सनातन धर्म से मिलते जुलते हैं !अगर कोई ये ना बताये की वह हिन्दू या मुसलमान या ईसाई है !तो यह पहचान नहीं हो सकती है !की इन तीनो धर्मों के मान ने वाले अलग अलग है !चूँकि हिन्दू धर्म ने कभी भी धर्मांतरण किसी दूसरे धर्म से हिन्दू धर्म में नहीं किया और ना कराया !किन्तु भारत और पाकिस्तान ,बांग्लादेश आदि के सभी मुसलमान और ईसाई हिन्दू धर्म से धर्म परिवर्तन कर मुसलमान और ईसाई हुए हैं !इसीलिए सभी धर्मो को भारत के मूल अहिंसक और करुणा प्रधान सर्व धर्म सम्भाव की रक्छा करनी चाहिए !और यहाँ पर किसी भी कीमत पर विचार की हत्या तलवार से नहीं की जानी चाहिए !और न भारत के मूल सनातन धर्म कोलोभ लालच या जोर जबरदस्ती से धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करना चाहिए !विश्व में भारत की इस मूल अवधारणा को सिद्ध करने की जिम्मेदारी सभी धर्मों पर है !
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