समाजवाद ,साम्यवाद आदि ये आयातित राजनैतिक दर्शन है !जो अपनी जन्मभूमि में ही असफल सिद्ध होगये हैं !और अगर भारत सहित कुछ देशों में दिखाई भी देता हैं !तो इनकी आकृति बड़ी भयंकर ,बदरंग और विकृत दिखाई देती है !जब कोई देश अपने मूल स्वभाव और प्रकृति को त्याग कर किसी अन्य प्रतिकूल धर्म या दर्शन का अनुकरण करने लगजाता है !तो ना तो उसको शांति प्राप्त होती है और ना ही वहां उत्तम व्यबस्था का जन्म हो पाता है !समाज के नेता और अगुवा रंगे हुए शियार हो जाते हैं !भारतीय समाजवाद का प्रस्तुतीकरण भगवान श्री कृष्ण न ३(९से १६) में किया है शरीर श्रम द्वारा श्रष्टि और समाज को विकसित करें ! श्रम के परिणामस्वरूप जो प्राप्त हो उसका यथायोग्य सभी का भाग उनको ईमानदारी से वितरण करें ! और जो अपने हिस्से में आये उसका उपभोग करें ! और फिर परिश्रम में जुट जाएँ ! इस प्रकार गीता में सार्वदेशिक और सर्वकालिक निष्पाप जीवन की योजना समाज के सामने प्रस्तुत की है !जो समाजवाद भारत में आचरित किया जा रहा है !वह समाजवाद नहीं समाज बर्बाद बाद है !यह जितनी जल्दी देश से विदा हो जाय उतना ही अच्छा है !सत्ता में बने रहने के लिए नेताओं को कई जोड़ तोड़ के आंकड़े फिट करना पड़ते हैं !और नेता लोग इस प्रयत्न में कभी कभी असंभव को संभव करने में भी लगे दिखाई देते हैं !इसीलिए बे इस लक्छ्य की प्राप्ति तो कर नहीं पाते हैं !किन्तु इस प्रयत्न में देश में जरूर कुछ समय के लिए अव्यबस्था उत्पन्न कर देते हैं !समाज में किसी का त्याग और पुण्य का भोग किसी और को प्राप्त हो जाता है !समाजवाद की स्थापना के लिए जो त्याग डॉ लोहिया ,आचार्य नरेंद्र देव आदि ने किया उसका फल मुलायम सिंह भोग रहे हैं !लोहिया अविवाहित रहे !समाजवाद की उत्कंठा ने उनको व्यक्तिगत सुखों का भोग करने का अवसर प्राप्त ही नहीं होने दिया !जब उनकी मृत्यु हुई तो उनके पास कुछ पुस्तकें और दो जोड़ी कपडे मात्र उनकी संपत्ति के रूप में थे !किन्तु उनके बाद समाजवाद की यात्रा जो सारे देश से सिकुड़ सिमट कर उत्तरप्रदेश में आकर रुकगयी है !और जो समाजवादी पार्टी के मुखिया के जोड़ तोड़ के गठबंधन से सिद्धांत बिहीन समाजवादी कार्यरत है !और अब अपने अंतिम दौर में है !उसके दो मजबूत पाये आजमखान और अमर सिंह रहे हैं !किन्तु समाजवादी गाडी के ये दो बाहक किसी करणबस अलग हो गए हैं !अमरसिंघ पार्टी से बाहर हो गए हैं !और आजमखान पार्टी पर हॉबी हो गए हैं !पार्टी प्रमुख इन दोनों बाहकों का उपयोग पार्टी के लिए करना चाहते हैं !इसीलिए जन्मदिन का केक भी दो बार काटा जा रहा है सपा प्रमुख की जोड़ तोड़ कला की परीक्छा हो रही है !देखते हैं सफलता प्राप्त होती है या नहीं ?
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