Sunday, 8 November 2015

नीतियुक्त आचरण --------(१)घोर जंगल में, दुर्गम मार्ग में, कठिन आपत्ति के समय , घबराहट में , और प्रहार के लिए शस्त्र उठे रहने पर भी आत्मबल से युक्त पुरुषों को भय नहीं होता है !भारत में साधु, संतों  ,ऋषि , मुनियों ,  महावीर , बुद्ध , नानक , कबीर , तुलसी आदि तथा आधुनकि काल में महात्मा गांधी आचार्य विनोबा भावे में इस आत्मबल का पूर्ण रूप से दर्शन होता है ! इसी आत्मबल का नाम  अहिंसा है ! जिसका प्रयोग गांधी जी ने देश की आजादी की लड़ाई में किया था ! और बिना सैनिक शक्ति  और धन जान  की हानि के भारत को स्वतंत्रता प्राप्त करायी थी  !और भारत की स्वतंत्रता के बाद भी जो १३७ देश गांधी जी की हत्या के ६० साल के अंदर आजाद हुए  !उन सभी ने गांधी जी के अहिंसक आंदोलन से प्राप्त प्रेरणा से अपने देशों के लिए स्वतंत्रता प्राप्त की  ! और गांधी जी को अपना प्रेरणा श्रोत्र बताया ! इसी अहंसिक  आत्मबल के कारण ही गांधी जी नित्य विकसित हो कर विश्व मानब बन गए हैं ! और आज विश्व गांधी के प्रेम करुणा और सहस्णुता  के आदर्शों का अनुयायी होता जा रहा है !
(२)उद्द्योग, संयम , ,दक्छता , ,सावधानी ,धैर्य ,स्मृति ,और सोच विचार कर कार्य आरम्भ करना ,----ये भौतिक और आत्मोन्नति के मूल मन्त्र हैं !
(३)तपस्वियों का बल है तप ,ज्ञानियो का बल है ज्ञान विज्ञान पापियों का बल है हिंसा और गुण बनो का बल है सहस्णुता और सर्वधर्म समभाव ,प्रेम करुणा छमा और अहिंसा !
(४)जल ,मूल ,फल ,गाय का दूध ,घी , गुरु का वचन और औषधि इनके व्रत में सेवन से व्रत भांग नहीं होता है !
(५)जो अपने प्रतिकूल जान पड़े ,उसे दूसरों के प्रति भी ना करे संक्छेप में यही धर्म का स्वरुप है ! इसके विपरीत जिस धार्मिक आचरण में कामना से प्रवृत्ति होती है ,वह तो अधर्म है !(
६)अक्रोध से क्रोध को जीते ,असाधु को सद्व्योहार से बस में करे कंजूस को दान से जीते और झूठ पर सत्य से विजय प्राप्त करे !

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