Monday, 1 August 2016

राजनेताओं को संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करना चाहिए ------ लोकतंत्र का सफल सञ्चालन ,लोकतंत्र में स्थापित संवैधानिक संस्थाओं के संवैधानिक आचरण के विधिबत पालन से ही संभव होता है !जब सांसद और विधायक ही संवैधानिक मर्यादाओं का पालन नहीं करते हैं !तब देश की अन्य सरकारी ,गैर सरकारी संस्थाएं भी आचरण भ्रष्ट हो जाती हैं !यह समझ कर राजनेताओं को अपने आचरणों में लोकतान्त्रिक मूल्यों को धारण करना चाहिए कि देश को लगभग १००० साल की गुलामी के बाद स्वतंत्रता प्राप्त हुई है  ! आजादी के संघर्ष में ज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों के साथ ही अज्ञात स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वालों की संख्या कही अधिक है !स्वतंत्र देश के अनुरूप जीवन जीने की कला का शिक्छ्ण जो अपने जीवन में उतारकर देते हैं ,बे ही सच्चे देशभक्त और स्वतंत्रता के रक्छक और सेनानी होते है !जब तक आमजनता तक  लोकतान्त्रिक मूल्यों  की आचरण पद्धति विकसित हीकर नहीं पहुंचती है !तब तक लोकतंत्र नुमायशी और कागजी ही बना रहता है !भारत में लोकतंत्र अभी कागजी ही दिखाई देता है! न्यायलय को बार बार राजनेताओं के अलोकतांत्रिक आचरणों को दण्डित करना पड़ता है !समाचार प्रकाशित हुआ है कि उच्चतम न्यायलय ने उत्तरप्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगले खाली करने का निर्णय दिया है ! निर्णय में न्यायलय ने राजनेताओं की अपनी सुविधाओं के लिए सरकारी सुविधाओं की बन्दर वांट की मनो बृत्ति की निंदा की है  ! अलीगढ में एक हिन्दू युवती के साथ मुस्लिम लोगों ने बलात्कार किया है ! इस कारण से अलीगढ  साम्प्रदायिक माहौल के चपेट में आगया है !उन बलात्कारियों को समाजवादी पार्टी का विधायक जमीरउल्लाह अपने यहाँ रखे हुए है !और चुनॉती दे रहा है !क़ि अपराधी मेरे घर में है अगर पुलिस में हिम्मत हो तो उनको गिरफ्तार करे !यह धमकी समाचार पत्रों में दो तीन दिन पहले प्रकाशित हुई थी ! इस विधायक के यहाँ से बलात्कार के आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाना चाहिए !और इसकी विधानसभा की मेम्बरशिप तत्काल समाप्त कर इसके विरुद्ध भी अपराधियों के संरक्छण देने के कारण दंडात्मिक कार्यबाही होनी चाहिए

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