व्योहारिक ज्ञान ----(१)प्रत्येक गृहस्थ के घर में यदि संभव हो तो घर में चार प्रकार के मनुष्यों को रहना चाहिए --अपने कुटुंब का बृद्ध पुरुष ,संकट ग्रस्त विद्वान ,धनहीन मित्र ,और बिना संतान की बहन!
(२)चार कर्म अनिष्ट निवारण करने वाले विद्वानो ने बताये हैं ---किन्तु यदि भी आदर के साथ ना किये जाएँ तो अनिष्ट कर सकते हैं --बे कर्म हैं --आदर के साथ अग्नि होत्र ,आदर पूर्वक मौन का पालन .आदरपूर्वक स्वाध्याय और विधि विधान के साथ श्रद्धा पूर्वक यज्ञ का अनुष्ठान !
(३)पिता माता अग्नि ,आत्मा और गुरु ----कल्याण के इक्छुक सभी मनुष्यों को यत्न से इनकी सेवा करनी चाहिए !
(४)देवता , पितर, मनुष्य , सन्यासी और अतिथि ---इन पांचों का यथायोग्य सत्कार करने वाले मनुष्य को यश की प्राप्ति होती है !
(५)संसार में मनुष्य कहीं भी जाकर निवास करे ! उसको सभी जगह पांच प्रकार के सह्बासी मनुष्य मिलेंगे ----मित्र ,शत्रु ,उदासीन ,आश्रय देने वाले और आश्रय मांगने वाले
(६)एशबर्या या उन्नति चाहने वाले मनुष्य को अधिक सोना ,तन्द्रा भय ,क्रोध प्रमाद ,तथा दीर्घ सूत्रता (जल्दी हो जाने वाले कार्य में अधिक देर लगाने का स्वभाव )इन ६ दुर्गुणों को त्याग देना चाहिए !
(७)मनुष्य को कभी भी सत्य का तत्त्व समझ कर सत्य बोलना ,दान कर्मण्यता अनसूया (गुणों में दोष देखने की प्रवृत्ति का अभाव )छमा तथा धैर्य ----इन ६ गुणों का त्याग नहीं करना चाहिए !
(८)धन की प्राप्ति ,निरोगी शरीर ,प्रियवादिनी अनुकूल रहने वाली धर्मपत्नी ,आज्ञाकारी पुत्र ,पुत्री तथा धन उपार्जन करने वाली विद्या का ज्ञान ---ये छे बातें संसार में मनुष्यों को सुख पहुचाने वाली होती हैं !
(९)शरीर के अंदर रहने वाले ६ शत्रुओं --- काम ,क्रोध ,लोभ ,मोह ,मद ,तथा मात्सर्य को जो मनुष्य नियंत्रित कर लेता है वह जितेन्द्रिय पुरुष कभी भी पापों में लिप्त नहीं होता है !और उस से कभी भी सामाजिक जीवन में अनर्थ की उत्पत्ति नहीं होती है १
(१०) ६ प्रकार के मनुष्य ६ प्रकार के लोगों से अपनी जीविका चलाते हैं ! !चोर असावधान पुरुष से ,डॉक्टर रोगी से ,कामोन्मत्त स्त्रियां कामग्रस्त मनुष्यों से ,पंडित ,पुरोहित ,कथाबाचक यजमानो से ,अधिकारी झगड़ाकरने वालों से तथा विद्वान पुरुष मूर्खों से अपनी जीविका चलाते हैं !
(११) निरोग रहना ,ऋणी ना होना ,परदेश में ना रहना अच्छे लोगों के साथ मित्रता होना ,अपनी बृत्ति से ईमानदारी से जीविका चलाना और निर्भय होकर रहना ---ये ६ मनुष्य लोक के सुख हैं !ईर्ष्या करने वाला ,घृणा करने वाला ,असंतोषी ,क्रोधी ,सदा शंकित रहने वाला और दूसरे के भाग्य पर जीवन निर्वाह करने वाला ----ये ६ सदा दुखी रहते हैं !
(२)चार कर्म अनिष्ट निवारण करने वाले विद्वानो ने बताये हैं ---किन्तु यदि भी आदर के साथ ना किये जाएँ तो अनिष्ट कर सकते हैं --बे कर्म हैं --आदर के साथ अग्नि होत्र ,आदर पूर्वक मौन का पालन .आदरपूर्वक स्वाध्याय और विधि विधान के साथ श्रद्धा पूर्वक यज्ञ का अनुष्ठान !
(३)पिता माता अग्नि ,आत्मा और गुरु ----कल्याण के इक्छुक सभी मनुष्यों को यत्न से इनकी सेवा करनी चाहिए !
(४)देवता , पितर, मनुष्य , सन्यासी और अतिथि ---इन पांचों का यथायोग्य सत्कार करने वाले मनुष्य को यश की प्राप्ति होती है !
(५)संसार में मनुष्य कहीं भी जाकर निवास करे ! उसको सभी जगह पांच प्रकार के सह्बासी मनुष्य मिलेंगे ----मित्र ,शत्रु ,उदासीन ,आश्रय देने वाले और आश्रय मांगने वाले
(६)एशबर्या या उन्नति चाहने वाले मनुष्य को अधिक सोना ,तन्द्रा भय ,क्रोध प्रमाद ,तथा दीर्घ सूत्रता (जल्दी हो जाने वाले कार्य में अधिक देर लगाने का स्वभाव )इन ६ दुर्गुणों को त्याग देना चाहिए !
(७)मनुष्य को कभी भी सत्य का तत्त्व समझ कर सत्य बोलना ,दान कर्मण्यता अनसूया (गुणों में दोष देखने की प्रवृत्ति का अभाव )छमा तथा धैर्य ----इन ६ गुणों का त्याग नहीं करना चाहिए !
(८)धन की प्राप्ति ,निरोगी शरीर ,प्रियवादिनी अनुकूल रहने वाली धर्मपत्नी ,आज्ञाकारी पुत्र ,पुत्री तथा धन उपार्जन करने वाली विद्या का ज्ञान ---ये छे बातें संसार में मनुष्यों को सुख पहुचाने वाली होती हैं !
(९)शरीर के अंदर रहने वाले ६ शत्रुओं --- काम ,क्रोध ,लोभ ,मोह ,मद ,तथा मात्सर्य को जो मनुष्य नियंत्रित कर लेता है वह जितेन्द्रिय पुरुष कभी भी पापों में लिप्त नहीं होता है !और उस से कभी भी सामाजिक जीवन में अनर्थ की उत्पत्ति नहीं होती है १
(१०) ६ प्रकार के मनुष्य ६ प्रकार के लोगों से अपनी जीविका चलाते हैं ! !चोर असावधान पुरुष से ,डॉक्टर रोगी से ,कामोन्मत्त स्त्रियां कामग्रस्त मनुष्यों से ,पंडित ,पुरोहित ,कथाबाचक यजमानो से ,अधिकारी झगड़ाकरने वालों से तथा विद्वान पुरुष मूर्खों से अपनी जीविका चलाते हैं !
(११) निरोग रहना ,ऋणी ना होना ,परदेश में ना रहना अच्छे लोगों के साथ मित्रता होना ,अपनी बृत्ति से ईमानदारी से जीविका चलाना और निर्भय होकर रहना ---ये ६ मनुष्य लोक के सुख हैं !ईर्ष्या करने वाला ,घृणा करने वाला ,असंतोषी ,क्रोधी ,सदा शंकित रहने वाला और दूसरे के भाग्य पर जीवन निर्वाह करने वाला ----ये ६ सदा दुखी रहते हैं !
No comments:
Post a Comment