Thursday, 8 October 2015

भारत की राजनीति सत्ता की लालच में फंसे राजनैतिक दलों और राजनैतिक नेताओं की एक दूसरे पर अशोभनीय और असभ्य शब्दों के प्रयोग से कहाँ पहुँच गयी है !कि चुनाव आयोग को पूर्वमुख्यमंत्रिओं मंत्रिओं और वरिष्ठ सांसदों से लेकर प्रधान मंत्री के भासण की भी जाँच करानी पड़ रही है !मेने अपने छात्र जीवन में तत्कालीन प्रधान मंत्री नेहरू जी ,जनसंघ के नेता अटलबिहारी बाजपेयी समाजवादी डॉ लोहिया के चुनावी भासण सुने थे !श्री अटलबिहारी बाजपेयी का भासण अत्यंत शिष्ट और सभ्य शब्दों में कांग्रेसी सत्ता के विरुद्ध चुटीले व्यंगो से परिपूर्ण था !उनके भासण में कहीं भी किसी प्रकार की कटुता  और क्रोध का दर्शन नहीं होता था !बल्कि श्रोताओं का मनोरंजन और ज्ञान वर्धन होता था !विद्यार्थी अपनी पढ़ाई छोड़ कर उनका भासण सुनने जाते थे !डॉ लोहिया का भासण अत्यंत विदुत्त्वता से भरा हुआ !तथा युवाओं को सामाजिक बदलाव के प्रति जागरूक और सामाजिक बदलाव के लिए सहभागिता के लिए शामिल होने के लिए होता था !बे कांग्रेस पर कड़ा प्रहार करते थे !नेहरू जी ने अपने डेढ़ घंटे के भासण में देश विदेश  में होने वाली प्रगति की चर्चा करते हुए !डॉ लोहिया का स्मरण करते हुए कहा था कि में चाहता हूँ  !कि डॉ लोहिया संसद में पहुंचे ! किन्तु बे मुझे चुनाव में हराकर संसद में पहुंचना चाहते है ! डॉ लोहिया नेहरूजी के खिलाफ फूलपुर संसदीय सीट से नेहरूजी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे थे !  अपने भासण के अंत में उन्होंने कांग्रेस के प्रत्यासी के बारे में सिर्फ इतना कहा था कि मुझे जानकारी नहीं है !कि यहाँ से जो कांग्रेसी प्रत्यासी है बो कैसा है ?अगर आप ठीक समझें तो उसको वोट दें !दुर्भाग्य से लोकतंत्र की इस आवश्यक बृत्ति और बुनियाद का राजनेताओं ने बिस्मरण कर दिया है! !और आज शब्दों के इस तीखे घमासान में लोकतंत्र की आत्मा नदारद हो गयी है !

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