Tuesday, 27 October 2015

व्योहारिक ज्ञान ------(१)अकर्मण्य ,बहुत खाने वाले ,सबलोगों से बैर करने वाले ,अधिक मायाबी ,क्रूर ,देशकाल का ज्ञान ना रखने वाले और निन्दित वेश रखने वाले मनुष्य से कभी व्योहार नहीं रखना चाहिए !
(२)बहुत कष्ट में होने पर भी कृपण, गाली बकने वाले ,मुर्ख ,धूर्त ,नीच सेवी ,निर्दयी, वैर बांधने वाले और कृतघ्न से कभी भी सहायता की याचना नहीं करनी चाहिए !
(३)क्लेश प्रद कर्म करने वाले ,अत्यंत प्रमादी ,सदा असत्य भासण करने वाले अस्थिर भक्ति भाव रखने वाले ,स्नेह से रहित ,अपने को बहुत अधिक चतुर समझने वाले ,---- इन ६ प्रकार के मनुष्यों की सेवा करने से बचता रहे ! प्रयत्न ये करे की इनकी सेवा और संग कभी करना ही ना पड़े !
(४)धन की प्राप्ति हमेशा सहायकों से ही होती है  !सहायक भी धन प्राप्ति की अपेक्छा रखते हैं ! ये धन प्राप्ति एक  दूसरे पर आश्रित है ! इसलिए परस्पर के सहयोग के बिना इसकी सिद्धि नहीं होती है !
(५)पुत्रों को ऋण के भार से मुक्त कर दे ,उनके लिए उचित जीविका का प्रबंध कर दे ,अपनी पुत्री या पुत्रियों का योग्य बर  के साथ विवाह कर दे ! तत्पश्चात मुनि बृत्ति से समस्त इक्छाओं ,आकांछाओं को त्याग कर मुनि बृत्ति से राग द्वेष रहित होकर लोकहित के लिए मनसा वाचा ,कर्मणा से सम्पर्पित जीवन जिए !
(६)जो सम्पूर्ण प्राणियों के लिए हितकर और अपने लिए भी सुखद हो ! ,उसे ईश्वरपर्ण बुद्धि से करे ! सम्पूर्ण सिद्धियों का यही मूल मन्त्र है !
(७)जिसमे बढ़ने की शक्ति ,प्रभाव ,तेज , पराक्रम ,उद्द्योग ,और अपने कर्तव्य पालन का दृढ निश्चय है ! उसे अपनी जीविका के नाश का भय कैसे हो सकता है?

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