Friday, 9 October 2015

युद्ध में नीति का प्रयोग करना पड़ता है !जो शत्रु सामने खड़ा है उसकी शक्ति और सामर्थ्य के अनुसार ही उसको पराजित करने की नीतिका निर्माण करना पड़ता है !इस प्रकार के युद्ध  बर्तमान समय में भी लड़े जाते हैं !किन्तु बर्तमान समय में युद्ध भौतिक संसाधनो से लड़ा जाता  है !महाभारत काल में सभी योद्धा दिव्य शक्तियों से युद्ध करते थे !इसीलिए भौतिक  शक्ति का अधिक महत्त्व नहीं था !कर्ण जन्म से कवच कुण्डल धारण कर जन्मा था !जब तक उसके पास कवच कुण्डल रहते तब तक उसको युद्ध में जीतना असंभव था !कर्ण सूर्य पुत्र था !जबकि अर्जुन इंद्र के अंश से उत्पन हुआ था !कर्ण महान दानी था उसका ब्रत था !कि जो याचक उस से कुछ मांगेगा उसको बो मांगी हुई बस्तु  अवश्य दे देगा !इसका लाभ इंद्र ने उठाया !और वह ब्राह्मण का बेश बनाकर कर्ण के पास गया !सूर्य  ने स्वप्न में कर्ण को समझाया कि वह ब्राह्मण वेश धारी इन्द्र को कवच कुण्डल न दे !क्योँकि कवच कुण्डल से हीउसका जीवन सुरक्छित था !किन्तु कर्ण ने सूर्य की बात नहीं मानी तब सूर्य ने कर्ण से कहा था कि वह कवच कुण्डल देने के बदले इंद्र से वैजन्ती शक्ति मांगले !जब तक उसके पास यह शक्ति थी !भगवान श्री कृष्ण युक्ति पूर्वक कर्ण से अर्जुन का युद्ध टालते रहे !अर्जुन को यह रहस्य ज्ञात नहीं था !जब घटोत्कच विजयन्ति शक्ति से मार दिया गया !तब श्री कृष्ण ने अपनी प्रसन्ता  व्यक्त की यह बात पांडवों को बुरी लगी !उन्होंने श्रीकृष्ण से  कहा की हमारा पुत्र मर गया है  !और आप प्रसन्नता व्यक्त कर रहे हैं ?तब श्री कृष्ण ने कहा की अगर घटोत्कच को कर्ण नहीं मारता तोइसको मुझे मारना पड़ता !जितने भी धर्म द्रोही है ! उनको मारने के लिए ही हमारा अवतरण हुआ है !इसको गीता में भगवान ने ४(७,८)में स्पष्ट कहा है ! कि जब जब धर्म की हानि और अधर्म की बृद्धि होती है ! तब तब ही में अपने आपको प्रगट करता हूँ ! साधुओं की रक्छा करने के लिए पाप कर्म करने वालों का विनाश करने के लिए और धर्म की भली भांति स्थापना करने के लिए में युग युग में प्रगट हुआ करता हूँ !श्री कृष्ण ने कहा कि तुम लोगों के हित में ही मेने एकलव्य का बध किया !शिशुपाल और जरासंध का बध हुआ !प्रागज्योतिषपुर के नरेश भगदत्त के वैष्णव  अस्त्र से अर्जुन की रक्छा की ! कर्ण को इन्द्र की दी हुई शक्ति का अर्जुन पर प्रयोग नहीं होने दिया !अगर ये सब जिन्दा रहकर दुर्योधन का साथ देते तो दुर्योधन कोपराजित करना संभव नहीं था !घटोत्कच राक्छस था  !और धर्मद्रोही था !इसीलिए उसका बध होना आवश्यक था ! इसी प्रकार कि युद्ध नीति का प्रयोग धर्म के लिए श्री कृष्ण ने भीष्म दुर्योधन द्रोणाचार्य आदि के बध  लिए भी  किया !ये सभी योद्धा दिव्य शक्तियों से युक्त थे !और इनको पराजित करना बिना नीति के संभव नहीं था श्रीकृष्ण गीता में १०(३८)में कहा है विजय चाहने वालों कि नीति में हूँ 

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