Friday, 2 October 2015

मोदी को गांधीजी की तरह साबरमती का संत कहना चापलूसी की पराकाष्ठा है !देश में गुलामी की मानसिकता से ग्रस्त आम आदमी से ज्यादा राजनेता है !इस तरह के चापलूस राजनेता जिस नेता के लिए इस प्रकार के अतिशय  प्रसंसा के शब्दों का प्रयोग करते है !बे उस राजनेता के पतन का मार्ग प्रस्तुत कर देते हैं !इसीलिए समझदार नेता इस तरह के अत्यंत चापलूसी से युक्त शब्द व्यक्त करने वाले व्यानो को महत्त्व नहीं देते हैं !और जो महत्त्व देते हैं !उनका राजनैतिक जीवन खतरे में पढ़ जाता है !इंदिरागांधी को भी तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्छ देवकांत बरुआ ने इंदिरा इज़ इंडिया एंड इंडिया इज इंदिरा कहा था !जब लालू प्रसाद बिहार के मुख्य मंत्री थे !तो एक चमचे ने उनकी तुलना भगवान श्री कृष्ण से की थी ! और लालू गीता भी लिख दी थी !मोदीजी का मंदिर बनाने का भी प्रयत्न हुआ था !मुलायम सिंह का भी मंदिर उनके प्रसंसक बनाने का प्रयास कर रहे थे !इस प्रकार की घटनाएं स्वार्थनिष्ठ लोगों के द्ववारा होती रहती हैं !मोदी जी को साबरमती का संत बताने वाले विजय गोयल  सांसद है !और बे अपने द्वारा प्रकाशित पोस्टर को सही भी ठहरा रहे हैं !सांसद से मंत्री बनने की आकांछा शायद उनके इस प्रकार से गांधीजी से तुलना करने का कारण हो सकती है !किन्तु मोदी इस प्रकार की तुलना से भ्रमित नहीं होंगे !और इस प्रकार के सांसदों से दूरी बनाकर अपने सांसदों को इस प्रकार की तुलना ना करने की हिदायत देकर समझ दारी का परिचय देंगे !और भाजपा में इस तरह की चमचागीरी को प्रोत्साहित नहीं करेंगे !

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