Sunday, 11 October 2015

वैदिक धर्म में तो सन्यासियों के लिए जिस विधि विधान का निर्माण किया गया है !उसके अत्यंत प्रितिकूल आचरण इन बाबाजी लोगों का दिखाई दे रहा है !हम कलयुग में रह रहे हैं !यह युग धर्म की दृष्टि से अत्यंत निकृष्ट काल है  !इस  युग के सम्बन्ध में लगभग सभी वैदिक धर्म ग्रंथों में धर्म के पराभव और साधु सन्यासियों संतो आदि के आचरण में योग के स्थान पर भोग की प्रधानता की भविष्य वाणी बहुत पहले कर दी थी !इसीलिए साधु संतो और सन्यासियों के पास अकूत धनसम्पत्ति होने से कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए !इस समय समाज में खानपान और दूषित जीवन चर्या के कारण समाज का धनिक बर्ग  मानसिक और शारीरिक रोगों से ग्रस्त हो गया है !चिकित्सिक भी रोग ग्रस्त होते हैं !बे बीमारों का इलाज तो दबाओं से  करते हैं !किन्तु दबाओं के सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों से अपने को मुक्त रखने के लिए योगिक क्रियाओं का आश्रय लेते हैं !योग जो प्राचीन भारत  में सिर्फ आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का काम करता था !आज रोगों के निवारण का प्रमुख साधन बन गया है !और इसी का लाभ उठाकर बाबा रामदेव रविशंकर माता आनंद मई आशाराम राम रहीम  आदि सन्यासियों सन्यासिनो ने अकूत धन संपत्ति इकट्ठी कर ली है !बाबा राम देव ने योग की विक्री से अपना कारोवार प्रारम्भ किया था ! फिर उसको आयर्वेदिक औषधियों के निर्माण से जोड़ा !फिर अब उसको गृहस्थ जीवन में उपयोग में आने वाले सभी खाद्द्य पदार्थों और श्रृंगार साबुन आदि के निर्माण से भी जोड़ दिया है !और अब वह पूर्ण रूप से कारोबारी बाबा बन गए हैं !ये सभी बाबा  धन शौहरत प्रभाव आदि के बहुत नजदीक है !किन्तु भगवान से इनकी दूरी भगवा और स्वेतवस्त्र धारी होने के बाद भी निरंतर बढ़ती जा रही है !प्राचीन भारत में सन्यासी परम्परा से भोग मुक्त परमात्मा भक्त आत्मनिष्ठ सन्यासियों का प्रादुर्भाव होता था !इन बाबाओं के सान्निध्य और जीवनचर्या से समाज में भोगयुक्त और संन्यास के स्वरुप से मुक्त संतो सन्यासियों साधुओं का जन्म हो रहा है !और यह तो इस कलियुग में होना ही है !तुलसी दास जी ने रामायण में कहा है ! कि इस कल  युग कि महिमा क्या कहें ? जिसमे सन्यासी धनी और गृहस्थ निर्धन होंगे

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