Wednesday, 28 October 2015

नारद जी भगवद गुणगान करते हुए !सभी लोकों में निरंतर घूमते रहते हैं !जब बे भ्रमण करते हुए संसार में आते हैं !तो सज्जन पुरुषों के लिए उत्तम मार्ग ग्रहण करने का उपदेश भी देते है !महाभारत में बहुत से आध्यात्मिक गूढ़ रहस्योँ को भी प्रस्तुत किया गया है !जिनको तर्क और बुद्धि से सिद्ध नहीं किया जा सकता है !द्रौपदी के जिन पांच पांडव पतियों का जिक्र किया जाता है !बे मूल रूप से एक ही दिव्य शक्ति के पांच रूप थे !व्यास ने इस तथ्य का खुलासा  द्रुपद के सामने किया था !क्योँकि द्रुपद इस बात से सहमत नहीं थे कि उनकी पुत्री का विवाह पांच पांडवों के साथ हो !द्रौपदी का वरण स्वयम्बर में अर्जुन ने किया था !इस के अलावा एक पुरुष की कई पत्निया तो होती थी !किन्तु एक पत्नी के कई पति नहीं हो सकते थे !यह धर्म और मर्यादा तथा नीति के विरुद्ध था !व्यास अपने समय के अलौकिक महात्मा थे !बे दिव्य ज्ञान और दिव्या शक्तियों से संपन्न थे !उन्होंने द्रुपद को दिव्य दृष्टि दे कर पांडवों के पूर्व शरीरों का दर्शन कराया था !और द्रौपदी का भी पूर्व शरीर दिखाया था !द्रौपदी स्वर्गलोक की लक्छमी थी !और पांचों पांडव इन्द्र शक्ति के अंश थे !इसलिए भूतल पर पांच शरीर धारी होने के बाद भी बे तत्त्व रूप से एक थे !द्रौपदी और पांडवों के इस कथानक को व्यास जी ने महाभारत में बताया है !महाभारत मनोरंजन प्रदान करने वाला उपन्यास नहीं है !इसमें अध्यात्म के गूढ़ रहस्यों को प्रस्तुत किया गया है !महाभारत में ८८०० श्लोक ऐसे हैं ! जिनका अर्थ सिर्फ व्यास जानते है !और सुखदेव जानते हैं !आध्यत्म के गूढ़  रहस्य सिर्फ साधना से ही खुलते हैं !नारदजी ने लोकदृष्टि से ही इस नियम का निर्माण किया था !पांडव लोग सभी धर्मानुरागी और धर्म का पालन करने वाले थे !धर्मपालन के लिए ही अर्जुन को यह नियम भंग करना पड़ा था !एक ब्राह्मण की अरणिमन्थन सहित गाय डाकुओं  ने अपहृत कर ली थी !जब उसने अपनी गायों को छुड़ाने के लिए कहा तब !अर्जुन को नियम भंग कर अपना गांडीव धनुष लेने के लिए द्रौपदी के महल में जाना पड़ा था !उस समय युधिस्ठर द्रौपदी के  महल मेँ एक बरष के लिए निवास कर रहे थे !किन्तु जिस समय अर्जुन गए उस समय युधिस्ठर राज दरबार में थे !ब्राह्मण की गायें बापिस दिलाने के बाद अर्जुन नियम भंग की शर्त के अनुसार १२ साल के बनवास को जाने के लिए तैयार हो गए !जब युधिस्ठर को इस बात की जानकारी हुई !तो उन्होंने अर्जुन को समझाया कि बे बनवास को ना जाएँ क्योंकि उन्होंने नियम भंग नहीं किया है !यधिस्ठर ने तर्क दिया कि पहली बात तो जिस समय अर्जुन महल में गए !उस समय बे वहां उपस्थित नहीं थे !(२)आर्य पुरुष दिन में पत्नी के साथ सहवास नहीं करते हैं (३)अर्जुन ने छात्र धर्म का पालन कर लुटेरों से ब्राह्मण की गाय वापिस करायी !(४ )अगर कोई अपराध अर्जुन ने किया भी है !तो उस अपराध को छमा करने का अधिकार मुझे हैं !और मेँ अर्जुन का अपराध छमा करता हूँ !किन्तु अर्जुन ने इन दलीलों को अस्वीकार करते हुए !कहा कि किसी भी तर्क के आधार पर नियम भंग को माफ़ नहीं  किया जा सकता है !अगर मेँ नियम का पालन नहीं करूँगा !तो लोग भविष्य में नियम भांग करेंगे और दंड ना भुगतने  के लिए मेरा उदाहरण प्रस्तुत  करेंगे !इसलिए अर्जुन ने सभी के आग्रह ठुकराते हुए !१२ साल बनवास में बिताये थे !

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