ऐसे हिन्दू और मुसलमान भारत में सेकंडो साल से रहे हैं ! और आज भी है ! जो एक दूसरे के धर्मों का सम्मान करते रहे हैं !उसका सबसे बड़ा कारण यह है कि अधिकांश भारत के मुसलमान इस्लाम कबूल करने के पहले हिन्दू ही थे !मुसलमानो के रीति रिवाजों में बहुत से हिन्दुओं के आचार देखे जा सकते हैं !झगडे की शुरुआत जब होती है !जब मुसलमानो के ऊपर प्रभाव रखने वाले मुल्ला मौलवी उनको मुसलमान के रूप में स्थापित करना शुरू कर देते हैं !फिर इसका लाभ राजनैतिक नेता भी उठाते हैं !आम हिन्दू और आम मुस्लमान अपनी दैनिक जीविका की समस्यायों से ही जूझता रहता है !हिन्दू और मुस्लमान जब अलग ढंग से सोचना और बर्ताव करना शुरू कर देते हैं !जब हिन्दू हिन्दू हो जाता है और मुसलिम मुसलिम हो जाता है ! तभी इन दो धर्मों में मक्का मदीना और कशी मथुरा प्रभावी हो जाते हैं !और मंदिर मस्जिद फिर दर्शन और उपासना के केंद्र नहीं रह जाता हैं !मस्जिदें आतंकवादियों कि शरणस्थली बन जाती हैं !मुअलिम उनके पैरोकार और संरक्छक बन जाते हैं !और इस्लाम के नाम पर दूसरे धर्म के लोगों को काफ़िर कह कर मौत के घात उतारने वाले ये क्रूर आतंकवादी जेहादी और मुसलिम योद्धा बन जाते हैं !गंगा जमुनी संस्कृति शव्द भी हिन्दू मुसलिम को भारत राष्ट्र का नागरिक होने के बाद भी उनको गंगा जमुना की तरह हमेशा हिन्दू और मुस्लमान के रूप में बने रहना देखना चाहता है !जबकि होना यह चाहिए और शव्द भी ऐसा निर्मित होना चाहिए कि भारत के अंदर रहने वाले देशी विदेशी सभी धर्मों के लोगों की पहचान भारतीय संस्कृति के रूप में होनी चाहिए !अगर हिन्दू मुसलमानो की संस्कृत गंगा जमनी संस्कृति है !तो हिन्दू बौद्ध सिख ईसाई पारसी यहूदी आदि धर्मों की संस्कृति को क्या नाम देना चाहिए ?इसलिए कहा यह जाना चाहिए की जैसे समुद्र में मिलने के पहले सभी नदियों नालों चाहे बे बड़े हों या छोटे रंग रूप आकार प्रकार में भिन्न हो !उनके उद्गम स्थान अलग अलग हों !किन्तु ये सब जब समुद्र में मिले तो इनका आकार प्रकार रंग रूप लम्बाई चौड़ाई सभी समुद्र में विलीन होकर सिर्फ समुद्र बन गयी !समुद्र में खोजने परभी ना गंगा मिलेगी और ना नर्बदा और युमना !उसी प्रकार से अगर देश बासी एक दूसरे के धर्मों का आदर करते हैं ! उनके तीज त्योहारों और उत्सवों में शामिल होते हैं !तो यह गंगा जमुनी संस्कृति नहीं हैं !भारतीय सनातन संस्कृति है !इस संस्कृति के उदाहरण महाभारत में मिलते हैं !जहाँ व्यास कहते हैं !कि जो सभी धर्मों का आदर करते हैं !सभी देवताओं को प्रणाम करते हैं !और सभी धर्मों की साधनाओ में श्रद्धा करते हैं !बे सुख पूर्वक परमात्मा को प्राप्त कर लेते हैं !एक और जगह वेद व्यास लिखते हैं कि जो धर्म दूसरों के धर्म का अनादर करते हैं वह धर्म नहीं है !अधर्म हैं !भारत में धर्म आम जन के लिए विवाद और विरोध का विषय नहीं है !यह विवाद और बिरोध तथा दंगे कौन कराता है ? क्योँ कराता है ?इसमें कौन मारा जाता है ?यह शोध और बोध का विषय है !सभी धर्माबलम्बीयों को जिनका धार्मिक विद्वेष फ़ैलाने में कोई दिलचस्पी या लाभ नहीं है !उनको इस पर विचार करना चाहिए !और इस राष्ट्रीय सनातन परम्परा को जो अनादि काल से प्रिचलित है !जिसका दर्शन मुसलमांनो द्वारा देवी की आरती में देखा जा रहा है !और हिन्दुओं द्वारा पीर की मजार पर चादर चढाने के रूप में दृष्टिगत हो रहा है !
No comments:
Post a Comment