व्योहारिक ज्ञान ----(१) मुर्ख मनुष्य विद्या ,शील ,अवस्था ,बुद्धि, धन में बढे सम्मानीय पुरुषों का सदा विरोध और अनादर किया करते हैं !
(२)जिसका आचरण और चरित्र निंदनीय है ! जो मुर्ख और गुणों में दोष देखने का आदी है ! अधार्मिक और गंदे वचन बोलने वाला है ! और अनावश्यक क्रोध करता है ! वह हमेशा संकटों से घिरा रहता है !
(३)जो राजनेता ठगी नहीं करता है ! अपने कर्तव्य का पालन करता है ! जनता के सामने दिए गए आश्वासनों को पूर्ण करने का प्रयत्न करता है ! और अपनी बात कुशलता पूर्वक रखता है !वह हमेशा लोकतंत्र में जनता के आदर का पात्र बना रहता है !
(४)किसी को भी धोखा न देने वाला ,चतुर ,कृतज्ञ ,बुद्धिमान और कोमल स्वाभाव वाला राजनेता यदि धन के अभाव से ग्रस्त हो तब भी उसके सहायक उसका साथ नहीं छोड़ते है !
(५) कुछ लोग गुणों के कारण समृद्ध होते हैं ! और कुछ लोग धन संपत्ति से ! जो संपत्ति बान होने के बाद भी गुणों से हीन हैं, उन्हें सर्वथा त्याग देना चाहिए !
(६)जो अधिक गुणों से संपन्न और विनयी तथा अहिंसक स्वभाव का है !वह प्राणियों का तनिक भी संघार होते नहीं देख सकता है ! और इसकी उपेक्छा भी नहीं कर सकता है !
(७)जो मनुष्य दूसरों की निंदा करने में ही लगे रहते हैं ! दूसरों को दुःख देने और आपस में फूट डालने के लिए सदा उत्साह के साथ प्रयत्न करते हैं ! ,जिनका विचार ,आचरण दोष युक्त है ! तथा जिनका साथ करने में भी बड़ा खतरा है ऐसे लोगों से कभी भी किसी प्रकार की आर्थिक या अन्य प्रकार की मदद लेने से बुद्धिमान मनुष्य को बचना चाहिए ! ऐसे लोगों की सहायता करने में भी बड़ा दोष है !और उनसे सहायता लेने में भी दोष है !
(८)जो बृद्धि भविष्य में नाश का कारण बने उसे अधिक महत्त्व नहीं देना चाहिए ! और उस नुक्सान का भी बहुत आदर करना चाहिए जो आगे चलकर भविष्य में उन्नति का कारण हो !
(९)बास्तव में नुक्सान ही बृद्धि का कारण होता है !वह नुक्सान नहीं है किन्तु उस नुक्सान को लाभ ही मानना चाहिए ! और उस लाभ को नुक्सान ही मानना चाहिए ! जिसे प्राप्त करने से भविष्य के बहुत से लाभ प्राप्त करने का नाश हो जाय !
(२)जिसका आचरण और चरित्र निंदनीय है ! जो मुर्ख और गुणों में दोष देखने का आदी है ! अधार्मिक और गंदे वचन बोलने वाला है ! और अनावश्यक क्रोध करता है ! वह हमेशा संकटों से घिरा रहता है !
(३)जो राजनेता ठगी नहीं करता है ! अपने कर्तव्य का पालन करता है ! जनता के सामने दिए गए आश्वासनों को पूर्ण करने का प्रयत्न करता है ! और अपनी बात कुशलता पूर्वक रखता है !वह हमेशा लोकतंत्र में जनता के आदर का पात्र बना रहता है !
(४)किसी को भी धोखा न देने वाला ,चतुर ,कृतज्ञ ,बुद्धिमान और कोमल स्वाभाव वाला राजनेता यदि धन के अभाव से ग्रस्त हो तब भी उसके सहायक उसका साथ नहीं छोड़ते है !
(५) कुछ लोग गुणों के कारण समृद्ध होते हैं ! और कुछ लोग धन संपत्ति से ! जो संपत्ति बान होने के बाद भी गुणों से हीन हैं, उन्हें सर्वथा त्याग देना चाहिए !
(६)जो अधिक गुणों से संपन्न और विनयी तथा अहिंसक स्वभाव का है !वह प्राणियों का तनिक भी संघार होते नहीं देख सकता है ! और इसकी उपेक्छा भी नहीं कर सकता है !
(७)जो मनुष्य दूसरों की निंदा करने में ही लगे रहते हैं ! दूसरों को दुःख देने और आपस में फूट डालने के लिए सदा उत्साह के साथ प्रयत्न करते हैं ! ,जिनका विचार ,आचरण दोष युक्त है ! तथा जिनका साथ करने में भी बड़ा खतरा है ऐसे लोगों से कभी भी किसी प्रकार की आर्थिक या अन्य प्रकार की मदद लेने से बुद्धिमान मनुष्य को बचना चाहिए ! ऐसे लोगों की सहायता करने में भी बड़ा दोष है !और उनसे सहायता लेने में भी दोष है !
(८)जो बृद्धि भविष्य में नाश का कारण बने उसे अधिक महत्त्व नहीं देना चाहिए ! और उस नुक्सान का भी बहुत आदर करना चाहिए जो आगे चलकर भविष्य में उन्नति का कारण हो !
(९)बास्तव में नुक्सान ही बृद्धि का कारण होता है !वह नुक्सान नहीं है किन्तु उस नुक्सान को लाभ ही मानना चाहिए ! और उस लाभ को नुक्सान ही मानना चाहिए ! जिसे प्राप्त करने से भविष्य के बहुत से लाभ प्राप्त करने का नाश हो जाय !
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