Thursday, 22 October 2015

सभी सम्मानीय मित्रों ,बंधुओं को दसहरा की राम ,राम .!बहुत से सज्जन आज के दिन रावण .कुम्भकरण और मेघनाथ के गगनचुम्बी पुतले बनाके राजनेताओं अधिकारियों के द्वारा इन पुतलों का दहन कराते हैं !इन पुतलों के निर्माण तथा भव्य समारोहों के व्यय की व्यबस्था करने वाले बड़े व्योपारी होते हैं !और ये सब कहते हैं कि दसहरा पर्व असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है !रावण असत्य के पोषक और भगवान श्री राम सत्य स्वरुप हैं !किन्तु क्या ये आयोजक ,पुतलों  का दहन करने वाले सत्य धारी ,सत्य का पोषण करने वाले और सत्य के आग्रही हैं ?यह विचार खोज  और शोध का विषय है !अगर आध्यात्मिक दृष्टि से सत और असत का विवेचन कर उसको धारण करने की इक्छा हो !तो भगवानश्री कृष्ण ने गीता २(१६)में सत ,असत को समझाया है !असत की तो कोई सत्ता नहीं होती है !और सत का अभाव अर्थात कभी विनाश नहीं होता है !रावण अपने समय का महान विद्वान और शक्तिशाली राजा था !जिसने मनुष्य गंधर्व यक्छ और देवताओं को भी पराजित कर अपने अधिकार में कर लिया था !उसके पास मानवी राक्छ्सी और देव सभी प्रकार की शक्तियां थी !उसने यह सभी शक्तियां भगवान शिव की आराधना तपस्या और आत्मबलिदान कर प्राप्त की थी !उसने अपने दस शीश काट कर भगवान शिव को अर्पित कर दिये थे !भगवान शिव ने प्रसन्न होकर उसे बरदान में ये सभी शक्तियां प्रदान की थी !किन्तु भगवान शिव से  प्राप्त इन शक्तियों का प्रयोग उसने अशिव कार्यों में करना शुरू कर दिया था !तात्पर्य यह है की जिस बरदान से उसे आत्मराज्य स्थापित करना चाहिए था !जिस से प्रजा में अहिंसा ,शांति ,सद्भाव, सौहाद्र स्थापित होना चाहिए था !उस शक्ति से उसने अवांछित भोग सामग्री और धन संपत्ति पृथिस्टा आदि प्राप्त कर लंका सोने की बना दी थी !और उसमे राक्छ्सों का निवास कर दिया था !मात्र उसी का भाई बिभीषण ही अकेला देव संस्कृति का मान  ने वाला था !उसको भी उसने लात मार कर लंका से निकल दिया था !उसकी शक्ति प्राप्त करने की आकांछा इतनी प्रवल थी !की उसने सूर्य चन्द्रमा कुबेर बरुण इंद्र आदि देवशक्तियों को भी अपने अधीन कर लिया  था !उसकी भोगेक्छा इतनी प्रवल थी !की उसके रनिवास में देव कन्याएं ,राक्छ्सों दैत्यों गन्धर्वों और मनुष्यों की हजारों कन्याएं उसकी भोग विलास के लिए थी !इसके बाद भी उसने माता सीता का अपहरण किया था !रावण अध्यात्म तत्त्व का ज्ञाता था !वह जनता था कि संसार के सभी पदार्थ नश्वर और विनाशी है !सभी शरीर भी एकदिन मृत्यु को प्राप्त होंगे !शरीर भी बृद्धावस्था को प्राप्त होगा ! और इसका रूप रंग भी नष्ट हो जाएगा !फिर भी उसने शिव यानि अविनाशी अजर अमर परमात्मा की उपासना से प्राप्त शक्ति का प्रयोग असत यानि विनासी भोगों के लिए किया !भगवान श्री राम ने इसी विनाशी यानि असत का विनाश रावण का बध कर सत यानी अविनाशी तत्त्व की स्थापना की !उन्होंने ११००० हजार वृष तक पृथ्वी का शाशन किया !और आत्मसत्ता यानि सत तत्व की स्थापना की !उनके राज्य में चोरी डकैती रिश्वत खोरी दुराचार अकाल मृत्यु आदि नहीं होते थे !समय पर पानी बरसता था !अन्न प्रचुर मात्रा में उत्पन्न होता था !कोई किसी का भी बिना मेहनत के धन नहीं लेता था !सभी अपने कर्तव्यों का पालन करते थे !उनका राज्य नैतिकता और आत्मनिष्ठा पर आधारित राज्य था !जिसे रामराज्य कहा जाता है !इसी राम राज्य की स्थापना का स्वप्न गांधी जी ने भारत में स्थापित करने के लिए देखा था !किन्तु जिस प्रकार आज राम के विरोधी असत यानि भोग पद संपत्ति अर्जन के आकांछी और सभी प्रयत्नो साधनो से विनाशी पदार्थों के संग्रह में लगे हुए महानभाव रावण आदि के पुतले दहन कर सत यानी  रामभाव का नाश करते हैं !उन्ही राम विरोधियों ने राम भक्त गांधी जी की हत्या कर !राम राज्य की स्थापना को समाप्त कर दिया था !आज के भारत में यही लोग रावण राज्य की स्थापना राम राज्य के नाम से स्थापित करने में लगे हुए है  !रावण इन अपने चाहने वालों के प्रति मुक्त मन से अपने पुतलों का दहन कराकर प्रसन्न हो रहा है !और इनकी प्रसंसा कर इनकी  पीठ थपथपा रहा है और आशीर्वाद दे  रहा है !और इनकी सफलता की कामना कर रहा है !इन आधुनिक रावणो से उसकी यह आशा बंधी है !कि वह राम से पराजित हो गया था  !किन्तु उसका दर्शन आज भी जीवित है !और आजकल उसके समर्थक असत्य पर सत्य की विजय के नाम पर असत्य की सत्य पर विजय करा रहे है !

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