Sunday, 4 October 2015

भारत में लोकतंत्र है !यद्द्पि ये बिकृत लोकतंत्र है !इसमें लोकतंत्र की आत्मा नहींहै !जनता बार बार सरकार बदलती है !और हर बार धोखा खाती है !फिर भी उसके सामने ऐसा विकल्प नहीं  है !जो लोकतंत्र को जन सेवा की और मोड़ दे !गांधीजी यद्द्पि स्वतंत्र भारत में मात्र ५माह और कुछ दिन ही जीवित रहे !यदि बे जीवित रहने दिए जाते तो स्वतंत्र भारत में सरकार का जो  चित्र उन्होंने  रेखांकित किया था !उस पर बे सफलता पूर्वक काम करते !और इस प्रकार का मुर्दा लोकतंत्र भारत को प्राप्त नहीं होता !१९७४ में जयप्रकाश नारायण ने लोकतंत्र का बिगुल फूंका !किन्तु बे भी अधिक समय जीवित नहीं रहे !और लोकतंत्र का लोक कल्याण का जो स्वरुप  उन्होंने संपूर्ण क्रांति के नाम से प्रस्तुत किया था !वह भी बिस्मृत हो गया !नितीश ,लालू और रामविलाश पासवान जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से ही राजनीतिमें उत्पन्न हुए  थे !किन्तु राजनैतिक स्वार्थ ने इन को एक दूसरे का प्रतिद्वंदी बना दिया !इनका मिलना बिछुड़ना ,सब स्वार्थ पर आधारित है !फिर भी हम सबको अशान्बित रहना चाहिए !ये सभी कभी न कभी राजनीत से बाहर  कर दिए जाएंगे !भारत १३०० वर्ष की गुलामी केबाद फिर खड़ा हो गया !तो इस स्वार्थनिष्ठ राजनीति का भी कुछ समय बाद अंत हो जायेगा

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