Sunday, 4 October 2015

भले ही अख़लाक़ की मृत्यु एक दुर्घटना हो !किन्तु यह दुर्घटना तो गाय के मास   पकाने पर हुई थी !इसीलिए जो मूलमुद्दा गाय बध को प्रतिबंधित करने का है !उस पर कोई सार्थक निर्णय लेना चाहिए !राजनेता भी दादरी के गाओं का राजनैतिक कारणों से ही दौरा कर रहे हैं !मुख्यमंत्री  ने मृतक मुआब्जे में १० लाख की राशि बढ़ाकर २०  लाख कर दी है !इस से एक और नया राजनैतिक विवाद खड़ा हो गया है !मृतक के आश्रितोँ को मुआबजा देने का काम सरकार मन मर्जी के मुताबिक़ करती हैं!  मुआबजा भी राजनैतिक लाभ की दृष्टि से दिया जाता है !गाओं  वाले सही विरोध नेताओं का  कर रहे हैं !कि जबतक राजनेता आते रहेंगे ! तब तक गाओं में शांति स्थापित नहीं हो सकती है !उनका दूसरा आरोप यह है कि अखलाख की मृत्यु में गाओं के निर्दोष लोगों को फसाया जा रहा है ? राजनेताओं के प्रति यह अविश्वास लोकतंत्र के प्रति ठीक नहीं है !राजनेताओं को  यह समझना चाहिए कि  बे अत्यंत साधारण परिवार से निकल कर सत्ता के शीर्ष पर पहुंचे हैं !और यह सब लोकतंत्र के कारण ही संभव हुआ है !इसीलिए उनको लोकतंत्र को मजबूत और सार्थक  करने केलिए जनता के प्रितिनिधि के रूप में काम करना चाहिए !

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