Sunday, 7 June 2015

वैदिक धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए गुरु गोविन्द सिंह जी ने स्वयं अखंड तपस्या हिमालय की पवित्र तलहटी में की थी !और धर्म की रक्षा के लिए ही धर्म की रक्षा के लिए समर्पित पंथ खालसा को जन्म  दिया था !समय का उलटफेर बड़ा भयानक होता है !आज सिख ही आपस में एक दूसरे पर तलवारों सेप्रहार कर रहे हैं !आज का समय हिंसा का नहीं है !सद्भाव और शांति का है !आज की मांग हिंसक नहीं अहंसिक धर्म की है !धर्म का काम दंड देने का नहीं है !दंड देने और व्यबस्था करने की शक्ति लोकतंत्र में सविंधान के अनुसार शासन  में सन्निहित है !धर्म का काम सिर्फ सद्गुणों और सदाचार तथा सभी धर्मों में सद्भाव स्थापित करने का है !सिखों ने धर्म की रक्षा के लिए तलवार उठाई थी !और अद्वतीय वीरता का प्रदर्शन किया था !आज उसी वीरता का प्रदर्शन सिखों को हिंसा मुक्त धर्म की स्थापना के लिए करना चाहिए !!लेकिन अहिंसा का मतलब कायरता नहीं है !बल्कि अहिंसा का अर्थ श्रेष्ठतम आत्मशक्ति का प्रदर्शन करना है !जिसका दर्शन पूर्व काल में नानकदेव और बुद्ध और  महावीर में होता है  !और आधुनिक काल में गांधीजी और आचार्य विनोभा भावे में दिखाई देता है

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