Saturday, 6 June 2015

लक्ष्मीजी का वाहन उल्लू क्योँ हैं ?!इस पर अनेक प्रकार के शाश्त्र सम्मत और समय के अनुसार व्याख्यएं प्रस्तुत की जाती हैं !लक्ष्मी चंचल है !यह बात भी अनुभव सिद्ध है !किन्तु लक्ष्मी शीलबान के पास स्थिर रहती है और उसकी प्राप्ति भी होती है !इसका एक प्रसंग महाभारत में है !धृतराष्ट्र ने अपने पुत्र दुर्योधन से कहा कि जैसी युद्धष्ठर   के पास लक्ष्मी है ! वैसी या उस से भी अधिक यदि लक्ष्मी की प्राप्ति तुम करना चाहते हो तो शीलबान बनो ! शीलबानो के लिए संसार में कुछ भी असंभव नहीं है !दुर्योधन ने पूंछा वह शील कैसे प्राप्त होता है ? धृतराष्ट्र ने कहा कि मन वाणी क्रिया द्वारा किसी भी प्राणी का द्रोह ना करना ,सब पर दया करना और यथा शक्ति दान देना यह शील कहलाता है अपना जो भी पुरुषार्थ और कर्म दूसरों के लिए हितकर ना हो अथवा जिसे करने में संकोच अनुभव होता हो उसे कभी भी नहीं करना चाहिए ! !नरेश्वर यद्द्पि कहीं कहीं शीलहीन मनुष्य भी लक्ष्मी को प्राप्त कर लेते हैं तथापि बे चिरकाल तक उसका उपभोग नहीं कर पाते हैं और जड़मूल सहित नष्ट हो जाते हैं  ! इसीलिए इस उपदेश को यथार्थ रूप से जानकार और समझ कर शीलवान बनो

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