धर्मनिरपेक्छ्ता को भाजपा हमेशा मुसलिम तुष्टिकरण की नीति के रूप में देखती रही है !और केंद्र में पूर्ण रूप से सत्ता में आने के पहले तक भाजपा ने प्रमुख रूप से कांग्रेस तथा अन्य विरोधी दलों के विरुद्ध यह मुद्दा जोर शोर से उठाया था ! कि देश के सभी राजनैतिक दल मुसलमानो के वोट पाने के लिए मुसलिम तुष्टिकरण की नीति का पालन करते हैं ! अब जबकि भाजपा केंद्र में सत्ता में हैं !तब से गांधीजी और नेहरूजी पर तमाम प्रकार के मन गढंत अत्यंत झूठे और गंदे आरोपों को लगाने का सिलसिला बहुत तेजी से चल रहा है !गांधी जी को हिंदूवादी संगठनो के समर्थक युवा बुद्धिजीवी आदि मुसलमानो का घोर पक्छपाती मानते हैं !!और यह कहते हैं कि अगर गांधी जी की हत्या गोडसे ना करता तो गांधी पाकिस्तान को देश का बहुत बड़ा हिस्सा दे देते !गांधीजी की हत्या राष्ट्र हित में आवश्यक थी !और गोडसे एक महान देशभक्त था !गांधी बहुत दुराचारी व्यक्ति था !महिलाओं के साथ नंगा सोता था !उसके बहुत सी महिलाओं के साथ शारीरिक सम्बन्ध थे आदि आदि !देश को आजाद गांधी जी ने नहीं कराया सुभाष बोस चन्द्र शेखर भगत सिंह आदि क्रांतिकारियों ने कराया !गांधी अंग्रेजो का एजेंट था !उसने भगत सिंह को फांसी से नहीं बचाया क्योंकि वह भगत सिंह की लोकप्रियता से जलता था !डॉ आंबेडकर के समर्थक गांधीजी को दलित विरोधी और ड्रामा बाज कहते हैं !मुस्लमान गांधी को काफ़िर मानते थे !जिन्ना उनको हिन्दू नेता मानता था !और हिन्दू गांधी जी को मुसलमानो का पक्छ्धर मानते थे !भारत के नवनिर्मण और विकास का आधार गांधी जी ग्राम स्वराज्य मानते थे ! जबकि नेहरू जी औद्यौगिक विकास को प्राथमिकता देते थे !गांधी नेहरू में इस मामले में गंभीर मतभेद थे !गांधीजी स्वतंत्र भारत में मात्र ५,६ माह ही जीवित रहे !गांधी जी पूर्ण रूप से व्योहार में आचरण में सत्य अहिंसा की निष्ठां का पालन करते थे ! सत्य अहिंसा का आचरण निष्ठा पूर्वक आज अधिकाँश गाँधीबादियों में भी नहीं दिखाई देते हैं !गांधी जी कहीं चर्चा में प्रसनसा के रूप में दिखाई देते हैं ! तो कहीं निकृष्ट आलोचना के रूप में किन्तु आचरण के रूप में गांधी जी का दर्शन कहीं भी दिखाई नहीं देता है !गांधी जी ने कहा था की आलोचना से मेरा बचाव मत करना !मेरा तो जन्म ही इसीलिए हुआ हैं !उन्होंने लिखा था की अच्छा यह होगा की मेने जो कुछ भी कहा है और लिखा है उसको मेरी लहाश के साथ ही जल दिया जाय क्योंकि कायम वह रहेगा जो मेने किया है वह नहीं जो मेने लिखा है !गांधी जी ने सत्य अहिंसा का पालन किया !उसके लिए संयम उनके जीवन की पद्धति थी सेवा उनके जीवन का ध्येय था और सत्य की प्राप्ति उनके जीवन का लक्छ्य था !इस समय इन तीनो चीज़ों की आवश्यकता राजनेताओं हिन्दू मुसलमानो सार्वजनिक कार्य कर्ताओं में और जीवन को संचालित करने वाले विविध छेत्रों में नहीं दिखाई देती हैं !इसीलिए गांधी आज सिर्फ आलोचना और प्रसंसा के लिए ही काम के हैं !भारतीय संस्कृति में मृत व्यक्ति की निंदा करना अच्छा नहीं माना गया है !जिस गांधी को देश ने शरीर से मार दिया आचरण में मार दिया उस गांधी को शव्दों में भी जीवित रखने का क्या फायदा है ?सत्य अहिंसा गांधी ने ईजाद नहीं किये थे !उन्होंने सिर्फ इनका आचरण भर किया था !इसीलिए अगर आचरण में सत्य अहिंसा नहीं है !तो गांधी जी कैसे रह सकते हैं !देश के राजनेता और उनके समर्थक सत्य अहिंसा से रहित आचरण जारी रखें और जब परिणाम देश के सामने आये तो श्मशान से भी गांधीजी की आवाज सुनाई देगी !
No comments:
Post a Comment