महाभारत में भी रात के दही खाने को नुक्सान के साथ ही पाप की श्रेणी में रखा गया है !महाभारत में रात में दही खाने वाले को, अपने मुह अपनी प्रसंसा करने वाले को, और दूसरे की धरोहर हड़पने वाले को पापी बताया गया है !पांडवों की माता कुंती देवी कहती थी की मेरे पुत्र कभी युद्ध में पराजित नहीं हो सकते हैं !क्योंकि ये भगवान श्री कृष्णा से रक्छित हैं ! तथा इन्होने कभी रात में दही नहीं खाया हैं ! और ना ही अपनी प्रसंसा खुद करते हैं ! और ना ही इन्होने किसी की धरोहर हड़प कर किसी के साथ विस्वास घात किया है !
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