Wednesday, 10 June 2015

पंडित रामप्रसाद बिस्मल का गीत सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैं !युवाओं में जोश भर देता था !और युवा देश के लिए अपना सर्वस्व कुर्वान करने के लिए तैयार हो जाते थे !आज भी युवाओं को इस गीत से प्रेरणा लेकर देश में व्याप्त गरीबी विषमता भ्रष्टाचार युवाओं में अनुशासन हीनता और छात्रों में  नक़ल टीपने  कीप्रवृत्ति छात्र संघ के अध्यक्छ पदाधिकारी चुने जाने के बाद जमीनो आदि पर कब्ज़ा करने की प्रवृत्ति  बेरोजगारी आदि के विरुद्ध संघर्श करने के लिए खड़ा हो जाना चाहिए !आज युवाओं को यह सब करने के लिए सर काटने या कटाने  की आवश्यकता नहीं है !सिर्फ इतनी ही आवश्यकता है कि युवा अपने आप को अनुशाषित और संयम में रखें शराब आदि ना पीयें ! छात्र ध्यान पूर्वक अध्ययन करें नक़ल ना टीपें !और अध्यापकों को भी पढ़ाने के लिए वाद्य कर दे !जो लोग बालू गट्टी मोरम का अवैधानिक ढंग से व्योपार कर रहे हैं !उनकी इन गतिविधियों को शासन तक पहुंचाएं और सार्वजानिक निर्माण कार्योँ में जो घपले हो रहे हैं उनके भी विरुद्ध आवाज बुलंद करें !जो भी देश और समाज के निर्माण के  लिएरचनात्मक काम हैं उन सब कार्यों को उसी प्रकार के समर्पित भाव से करें जैसे रामप्रसाद बिस्मल आदि ने अपने जीवन को देश हित में हँसते हँसते कुर्वान कर दिया था !बिस्मल के त्याग पूर्ण जीबन की सिर्फ शव्दिक प्रसंसा से काम नहीं चलेगा !उनके त्याग की मूल भावना को देश हित में रचनात्मक कार्य करके पूरी करना होगी !

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