Monday, 15 June 2015

आजमखान ने एक व्यान में कहा है कि राम पैगम्बर हो भी सकते है !या नहीं भी हो सकते हैं ?यह कथन  धर्मों के मूलस्वरूप में विद्यमान फर्क को दर्शाता है !इस्लाम ईश्वर के अवतार को नहीं मानता है ! , पुनर्जन्म को भी नहीं स्वीकार करता है  !,और भी  इस्लाम में धार्मिक आचार व्योहार और कर्मकांड की बहुत सी विधियां  हैं जो हिन्दू धर्म के विपरीत हैं !इस प्रकार के धार्मिक मतभेद हिन्दू धर्म में भी है !और हिन्दुधर्म तथा अन्य धर्मों में भी हैं !धर्मों की इस विविधता  को देखते हुए ही देश ने धर्मनिरपेक्छ संविधान का निर्माण किया था !  किन्तु इस धर्मनिरपेक्छ्ता के कारणदेश में हिन्दू धर्म की मौलिक मान्यताओं और आधारों का बहुत नुक्सान हुआ है  !और धर्मनिरपेक्छ्ता हिन्दू धर्म के अतिरक्त अन्य धर्मों की पोषक हो गयी !और हिन्दू धर्म कि मूल मान्यताओं और आधारों तथा धार्मिक अवधारणाओं कि विनाशक हो गयी ! बहुत से हिन्दू मानव धर्म की बात करते हैं  !किन्तु जिस आचरण से मानव धर्म पैदा होता है ! और उसका पालन होता है !और मनुष्यों के मन मष्तिष्क  बुद्धि और आचरण में मानवता मैत्री करुणा आदि प्रवेश करती है ! उन हिन्दू धर्म की विधियों और उनको आचरण में उतारने वालों ऋषियों तथा मानव धर्म को स्थापित करने के लिए मनुष्य के रूप में अवतार लेने वाली परम ईश्वरी शक्ति के अवतरित होने आदि की बातों के ज्ञान  को ना तो स्वीकार करते हैं ! और ना ही उनको अपने जीवन में उतारते हैं !इस ज्ञान और मानव धर्म को  विद्यालयों के माध्यम से बच्चों तक पहुँचाने के मार्ग को  भी अवरुद्ध कर दिया है  !परिणाम स्वरुप मानवता का संस्कार ही बच्चो में पैदा नहीं हो पाया है  !इसिलए १९४७ के बाद जिस पीढ़ी के पास देश की व्यबस्था संभालने की जिम्मेदारी आई उन  तपे  हुए लोगों ने कुछ समय तक तो मनसा वाचा कर्मणा धर्मनिरपेक्छ्ता के सिद्धांत को जीने की कोशिश की  !किन्तु समय के साथ यह धर्मनिरपेक्छ्ता हिन्दू धर्म का नाश और ईसाई और मुसलिम धर्म की पोषक बन गयी !आज देश में हिन्दू धर्म सहित जितने भी धर्म हैं !उनमे मानवता लग भग व्योहार के रूप में नहीं के बराबर दिखाई देती है !स्वार्थ के घनी भूत अंधकार ने धर्म के मूल तत्त्वों को धर्म से  निकाल कर बाहर फेंक दिया हैं !और आजमखान जैसे  लोग हिन्दू धर्म की व्याख्या इस्लाम की दृष्टि से करने लगे हैं !इस सदी में इस्लाम का जितना खौफनाक हिंसात्मक स्वरुप विश्व के सामने आरहा है ! उस से विश्वशांति को भी खतरा उत्पन्न हो गया है !ईशाई मुल्कों में आप ईशाई धर्म की आलोचना और निंदाकर सकते हैं !यहां तक की आप ईशा हुए थे या नहीं इस पर भी प्रश्न चिन्ह खड़े कर सकते हैं? !ईशाई देशों में आप मस्जिद मंदिर गुरुद्वारों का निर्माण कर सकते हैं !अकेले अमेरिका में ही २५०० मस्जिदें हैं और १००० से अधिक मंदिर हैं !विश्व का सबसे बड़ा स्वामी नाथ सम्प्रदाय का मंदिर अमेरिका में बन रहा है !किन्तु इस्लामिक राष्ट्रों में अन्यधर्मो के पूजा घर देखने को नहीं मिलेंगे !ईशनिंदा कानून के कारण कोई मुहम्मद साहिब या कुरान  के विरुद्ध एक शब्द भी नहीं बोल सकता है !किन्तु भारत में भगवान राम पैगम्बर थे या नहीं यह कहा जा सकता है !वह ईश्वर नहीं थे इसकी घोषणा तो बाजे बजा कर की जा सकती है !मानवता का मूल अहिंसा माँ विद्यमान है !इसीलिए जब तक देश में गाय का बध बंद नहीं होगा जीवहत्या समाप्त नहीं होगी !हिंसा का आचरण पोषण करने वाले धर्मों का समर्थन बंद नहीं होगा तब तक धर्मनिरपेक्छ्ता सिद्ध नहीं होगी !हिंसा का समूल विनाश ही मानव धर्म की जननी है !और इसका आश्रय स्थल भारत भूमि में जन्म लेने वाले धर्मों में विद्यमान है !जैन धर्म आचार व्योहार और विचार में हिंसा का पूर्ण निषेध करता है !और मैत्री करुणा अहिंसा का पोषक है !इसीलिए बर्तमान युग में इन आधारों को स्वीकार कर मानवधर्म की स्थापना की जा सकती है !

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