Sunday, 14 June 2015

प्रत्येक मनुष्य के पास चलने के लिए पैर और काम करने के लिए हाथ है !सोचने समझने और निर्णय करने के लिए मन बुद्धि और अहंकार है !इन सभी साधनो से मनुष्य संसार में  प्राप्त पदार्थों का उपभोग करता है !मनुष्यों में जन्म से ही कुछ कमजोर कुछ मंद बुद्धि तथा कुछ तेज दिमाग और स्वस्थ  व्यक्ति जन्म लेते हैं !कुछ बहुत सुन्दर कुछ सामान्य और कुछ बदसूरत  व्यक्ति भी जन्म लेते है !मनुष्यों में  विविधता जन्म जात होती है !मनुष्यों के अलावा भी ब्रक्छ पशु पक्छी आदि बहुत से जीव जंतु भी पृथ्वी पर जन्म लेते हैं !मनुष्य को ही श्रष्टि के इन सभी जीव जंतुओं और मानव समूहों को व्यबस्था करनी पड़ती है !इसलिए मनुष्य की बुद्धि प्राकृतिक पदार्थों का उपभोग करते समय इस बात का ध्यान रखे की सब पदार्थ संसार में जन्मे सभी लोगों के उपभोग के लिए हैं !और उसकी बुद्धि मोहग्रस्त होकर सारे पदार्थों को अपने ही उपभोग में इस्तेमाल न करने लगे !इसीलिए ५ सनातन आधारों --- सत्य अहिंसा अपरि गृह ब्रह्मचर्य और अस्तेय का जन्म हुआ !सत्य का अर्थ है कि जैसा देखा सुना और समझा हो उसको उसी प्रकार से कहाजाय !अहिंसा का मतलब है की जैसे हमें अपना जीवन प्रिय है और हम किसी भी प्रकार का  शारीरिक मानसिक कष्ट नहीं चाहते हैं !इसी प्रकारसे हम भी किसी को  मारें नहीं ! न ही जुबान से और कर्म से किसी को कष्ट दें !अपरिग्रह का मतलब है की हम जरुरत से ज्यादा बस्तुओं का संग्रह न करें ! और यह ध्यान में रखें की संसार की सभी वस्तुओं पर सभी का समान अधिकार है !ब्रह्मचर्य का अर्थ है की समाज में दुराचार न फैले और स्त्री पुरुष सम्बन्ध से जो संतान उत्पन्न हो उसका सही लालन पालन हो इसको लिए स्त्री पुरुष अपनी कामेन्द्रिय पर नियंत्रण रखे !और काम सम्बन्ध सिर्फ विवाहित स्त्री पुरुष के मध्य ही हों ! !अस्तेय का मतलब है कि दूसरे की वस्तु की चोरी ना करें और अपने शारीरिक श्रम से उपार्जित धन से ही अपना पालन पोषण करें !इन्ही ५ सनातन आधारों का व्यक्ति की बुद्धि पर प्रभावी नियंत्रण रहे  !संसार में विविध संस्थाओं का जन्म हुआ !धर्म भी उन्ही संस्थाओं में से एक है !यद्द्पि धर्म में बहुत सी बुराइयां है !फिर भी धर्म का कोई विकल्प नहीं है !मनुष्य जीवन के इन ५ सनातन आधारों को धार्मिक साधनाओ भगवान के डर और जन्नत जहन्नम आदि के भय से नियंत्रित किया जाताहै !विभिन्न युगों में  धर्म के बिभिन्न रूप प्रगट होते रहे हैं !किन्तु आज के युग के लिए सभी प्रकार की हिंसा और क्रूरता मुक्त धर्म की आवश्यकता है !

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