Friday, 12 June 2015

बालश्रम कलंक है !बालकों के हाथ में चाय के प्याले के बजाय किताबें होनी चाहियें !ऐसे ही अनेक वाक्यों के साथ बाल श्रम निषेध दिवस मनाने की ओपचारिकता पूरी कर दी गयीं  !बाल  श्रम निषेध कानून  के बाद भी लोग  अपने बच्चों से जीविकापार्जन के लिए  काम कराने के लिए मजबूर हैं !कुछ गिने चुने लोग हैं जो हरप्रकार की विचार गोष्ठियों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा कर गीत और गजलें पढ़कर अपने भासण देने के शौक को पूरा करते हैं !कुछ संचालन विशेषज्ञ भी हैं !जो इसी काम के करने में लगे रहते हैं !बाल श्रम निषेध के सफलता पूर्वक क्रियांबन में कई वधाएं है किन्तु प्रमुख रूप से प्राथमिक शिक्छा का पूर्ण रूप से ध्वस्त होना हैं !सरकार ने प्राथमिक शिक्छा के अच्छे क्रियांबन के लिए कई महत्व पूर्ण कार्य किये है !प्राथमिक शिक्छ्कों की तन्ख्वोहों में असाधारण बृद्धि की है !बच्चों को मुफ्त भोजन ड्रेस और पुस्तकों की व्यबस्था की गयी है !बच्चे अधिक से अधिक संख्या में पढ़ने आएं इसके लिए सर्व शिक्छा अभियान और कई गैर सरकारी संगठन और स्वयं शिक्छक और शिक्छा बिभाग के अधिकारी  भी इसके लिए प्रयत्न करते हैं !किन्तु सारे प्रयत्नो के बाबजूद भी बच्चे प्राथमिक पाठशालाओं में पढ़ने नहीं आते है !इसका क्या कारण है ?इसका कारण है कि यह सब सिर्फ कागजों में होता है ! अगर यह व्यबस्था सुधर जाय तो फिर गरीबों के अधिकाँश बच्चे  बालश्रम करने से बच सकते हैं !यद्द्पि इसके साथ दूसरी समस्यायों पर भी ध्यान देना होगा !किन्तु इस व्यबस्था में सुधार से कुछ फर्क पड़ सकता है !बच्चों को प्राप्त होने वाली सुविधाएं उनको प्राप्त हों !यह कार्य इन सुविधाओं का स्वयं उपयोग और उपभोग  करने वाले शिक्छक ग्राम प्रधान शिक्छा अधिकारी कभी नहीं करेंगे !यह कार्य युवाओं को करना होगा! भासण देने वाले लोग भासण देकर   अपना उत्तरदायित्व पूरा करते हैं  !किन्तु यह क्योँ हो रहा है ?इसे रोकने के लिए जो कानून बने हैं उनका पालन हो रहा है ? या नहीं इस पर कोई विचार नहीं हुआ ?कानून का पालन न करने वालों पर कठोर कार्यबाही की बात तो अधिकारीयों ने की !किन्तु कानून का पालन ना कराने वाले अधिकारियों कर्मचारियों को दण्डित कराने की बात पर कोई विचार नहीं हुआ !जबकि कानून का पालन ना करापाने  लिए ये भासण देने वाले लोग ही मुख्य रूप से जिम्मेदार है !विचार गोष्ठियों में समस्या के निराकरण के लिए विचार प्रस्तुत नहीं किये जाते हैं !और नाही उन लोगों की सहभागिता होती है जो वास्तव में इस बालश्रम निषेध कानून के बाद भी अपने बच्चों से जीविकोपार्जन के लिए काम कराने के लिए मजबूर होते हैं !कुछ गिने चुने भासण देने में रूचि रखने वाले लोग ही जिन्हे न तो समस्या का ज्ञान होता है और न ही उनके पास कोई समाधान होता सिर्फ गीतों गजलों के माध्यम से अपनी भासण देने कि इक्छा पूरी करते हैं !बाल श्रम न हो इसके मार्ग में कई बाधाएं है जिनमे से एक बाधा प्राथमिक शिक्छा का पूरी तरह से ध्वस्त होना है !गरीबों के बालकों को मुफ्त शिक्छा प्राप्तहो इसके लिए सरकार ने बच्चों के लिए मुफ्त भोजन किताबें और ड्रेस आदि की व्यबस्था की है !शिक्छक बच्चों को ठीक से पढ़ाएं इसके लिए उनको बहुत अच्छा बेतन दिया जा रहा है !इसके अलावा बच्चे ज्यादा से ज्यादा पढ़ने आएं इसके लिए सर्वशिक्छा अभियान आदि कार्यक्रम भी चलाये जाते है ! जिनमे गैर राजनैतिक संगठन शिक्छक और शिक्छा अधिकारी भी शामिल होते हैं !इसके बाद भी प्राथमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों कि संख्या नहीं बढ़ती है ?इसका कारण है कि बच्चो को ये सुबिधायें प्राप्त नहीं होती हैं !शिक्छक भी पढ़ाने नहीं जाते हैं !और सुविधाओं को शिक्छक ग्राम प्रधान मिलकर खा जाते हैं !शिक्छा अधिकारी भी इन सब में शामिल रहते हैं !यदि प्राथमिक शिक्छा सही रूप से काम करे तो अधिकाँश गरीबों के बच्चों के हाथों में चाय के प्यालों के स्थान पर किताबें दिखने लगेंगी !प्राथमिक शिक्छा में सुधार ये शिक्छक प्रधान आदि नहीं करेंगे क्योंकि इन्हे बच्चो को प्राप्त होने वाली सुविधाओं को अपने उपभोग में लेने कि आदत पड़ गयी है !यह काम तो ग्रामीण छेत्र की जनता  युवकों और बच्चों के अभिभावकों को ही करना होगा !

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