Monday, 8 June 2015

महाभारत में अग्नि, ,अंगिरा, गार्ग्य, धौम्य, तथा जमदग्नि, द्वारा धर्म के व्योहारिक क्रियान्वन का वर्णन किया गया है !लक्ष्मी जी कहतीहैं!  जिस घर में सब पात्र इधर उधर बिखरे पड़े हैं ! वर्तन फूटे और बैठने के आसन फटे हों ! तथा जहाँ महिलाओं पर अत्याचार किये जाते हों उनका सम्मान न किया जाता हो वह घर अधर्म के कारण दूषित होता है ! पाप से दूषित हुए उस घर से उत्सव और पर्व के अवसरों पर देवता और पितर निराश लौट जाते हैं ! तथा उस घर की पूजा स्वीकार नहीं करते हैं !धौम्य ऋषि ने कहा घर में फूटे वर्तन टूटी खाट, मुर्गा, कुत्ता ,और पीपल आदि  बड़े  ब्रक्छ  का होना अच्छा नहीं माना गया है ! फूटे बर्तनो में कलियुग का बास कहा गया है ! जिस से गृह में अशांति और कलह होती है !टूटी खाट रहने से धन की हानि होती है ! मुर्गे और कुत्ते के रहने पर देवता उस घर में पूजा अर्चा हवन आदि का प्रसाद ग्रहण नहीं करते हैं  ! तथा मकान के अंदर कोई बड़ा ब्रक्छ होने पर उसकी जड़ के अंदर सांप बिच्छु आदि जंतुओं का रहना अनिवार्य हो जाता है इसीलिए घर के भीतर बड़े  ब्रक्छ ना लगाए

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