Thursday, 18 June 2015

झाँसी की रानी की पुण्यतिथि युवाओं को कुछ कर्त्तव्य करने की प्रेरणा भी प्रदान कराती है !सिर्फ खूब लड़ी मर्दानी थी वह झांसी वाली रानी थी !और उसके त्याग और बलिदान को हम शत शत नमन करते  हैं !रानी की प्रसंसा में दिए गए ये वक्तव्य और गाये गए वीरता के गीत रानी को प्रसन्न नहीं कर सकते हैं !और न ही उनके त्याग और शौर्य प्रधान जीवन के बलिदान को कोई सार्थकता प्रदान कर सकते हैं !पुण्यतिथि पर हमें कुछ सार्थक निर्णय लेने होंगे ---(१)सिर्फ अखबार में फोटो छपवाने में बक्त बर्बाद करने के बजाय कुछ रचनात्मक काम बिना किसी प्रचार के उद्देश्य से प्रारम्भ करो की अखबार खुद तुम्हारी तलाश करने लगें !अखबार  उनको ज्यादा महत्त्व देते हैं जिनसे अखबार चलता है ! और बिकता है !अभी क्रिकेट के कार्यक्रम में कुछ फ़िल्मी लड़के लड़कियां आये थे  जो छोटी मोटी फिल्मों में दिखाई देते हैं !और लड़कियां जो अंगप्रदर्शन और अभिनय करती  हैं !सभी अखबारों ने उनके इंटरव्यू प्रकाशित किये और उनके फोटो प्रमुखता से छपे क्योंकि उनसे ये अखबार चलते हैं !और कुछ लोग अपने समाचार और फोटो अखवारों में छपवाने के लिए अपना कीमतीसमय बर्बाद करते हैं !फिर भी अखवार ऐसे लोगों को कोई ख़ास महत्त्व नहीं देते हैं !इसीलिए जिले में ऐसे बहुत से जो  जनविरोधी कार्य हो रहे हैं उनका  अगर युवा विरोध करें तो बे खुद समाचार बनेगे और अखबार भी  उनको तलाशेंगे और छापेंगे भी !(२)किसी भी राजनैतिक दल या राजनेता का अनुचित समर्थन ना करें और ना ही अपना समय राजनेताओं की चमचागीरी में बर्बाद करें !क्योंकि राजनेताओं का प्रभाव कपूर की तरह होता है जो देखते देखते ही उड़ जाता है !ये नेता तो उस सूखे  पत्ते की तरह हैं जो सत्ता की हबा से कुर्सी  पा जाते हैं और कुर्सी के जाते ही हबा हो जाते हैं !इसीलिए अगर रानी से प्रेरणा लेना हो तो ऐसे  रचनात्मक काम करो की रानी की तरह लोगों की याद में बस जाओ और समाज में गुलाब की सुगंध की तरह महकते रहो !और समाज को भी  महकाते रहो

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