Thursday, 13 August 2015

आजादी का ६८ बा स्वतंत्रता दिवस  १५ अगस्त को देश और देश के बाहर भी उल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाएगा !देश ने अन्य स्वतंत्र राष्ट्रों की अपेक्छा काफी तरक्की की है !कुछ देश तो भारत के बाद आजाद हुए किन्तु बे विकास में भारत से आगे निकल गए !किन्तु भारत के साथ ही आजाद होने वाला पाकिस्तान ना तो लोकतंत्र स्थापित कर पाया  !और ना ही अपने देश को एक रख पाया ! परिणाम स्वरुप वह दो देशों में बिभाजित हो गया !उसके और बिभाजित होने की प्रवल संभावना है !लोकतंत्र को भारत कायम रख सका यह भारत की सबसे बड़ी सफलता है !अभी लोकतंत्र को और अधिक विकसित होने की आवश्यकता है !!लोकतंत्र के सही स्वरुप के प्राप्त होने में कई बाधाएं हैं (१)भारत  में चुनाव कराने  के लिए  निर्वाचन आयोग है !और उसकी देख रेख में संसद और विधान सभाओं के चुनाव निष्पक्छता से होते हैं !किन्तु कही कही नेताओं की दबंगई के कारण बूथ कैप्चरिंग भी होता  है !मतदाताओं को जातिबाद अगड़ा पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक  आदि के नाम पर लामबंद करना और मतदाताओं को लोभ  लालच शराब पिलाकर और धन देकर अपने पक्छ में मतदान कराना ये आम बात है !!यह रोग गाओं तक में और सामजिक शैक्छणिक  अधिवक्ताओं  आदि के संगठनो में भी प्रवेश कर गाय है !इसतरह  लोकतंत्र की बुनियाद में ही भ्रष्ट आचरण प्रवेश कर गाय है (२) इस बीमारी के कारण प्रितिनिधि अपने सामजिक हित के उद्देश्य से कर्त्तव्य करने के लक्छ्य से भटक गए हैं !और प्रतिनिधि के रूप में चुने जाने के बाद बे बेईमानी से धन संग्रह करते हैं !परिवार  बाद को बढ़ाते हैं !इस बेईमानी में सरकारी तंत्र भी शामिल हो जाता है !इन लोगों की आपसी गठजोड़ से जनहित की योजनाओं के लिए आवंटित धन का मात्र चौथा हिसा ही विकास के कार्य में लगता है !बाकी इन लोगों के पेट में समा जाता है !सभी ठेके राजनैतिक दलों के नेता प्राप्त कर लेते हैं !और निर्माण कार्य हो या, उत्खनन का कार्य हो ,या खनिज और ब्रक्छों की रक्छा का कार्य हो !इन सबका उपयोग और दुरपयोग इन लोगों द्वारा अपने हित में दबंगई से किया जाता है !जल जंगल और जमीन अपना  स्वाभाविक स्वरुप लगभग खो चके हैं !एक सबसे बड़ी समस्या सामाजिक इन्साफ की भी  है !संबिधान में दलितों के लिए आरक्छण की व्यबस्था १० साल के लिए की गयी थी !किन्तु यह अभी भी कायम है !और अब आरक्छण की मांग लगातार बढ़ती जा रही है !अगड़े पिछड़े अल्पसंख्यक सवर्ण सभी आरक्छण की मांग कर रहे हैं !जिस आरक्छण का जन्म न्याय के लिए हुआ था ! वह अब अन्याय का पोषक हो गया है !आरक्छण में जो दलित जातियां शामिल हैं !उनमे से सिर्फ एक दो जातियों को  ही आरक्छण का भरपूर लाभ मिला है !जिन जातियों को आरक्छण का भरपूर लाभ प्राप्त हुआ है !उनमे भी आरक्छण से सिर्फ कुछ राजनैतिक परिवार ही अधिकाँश में लाभान्वित हुए है !यही स्थिति पिछड़ों के आरक्छण की है !आरक्छण में न्याय की दृष्टि का पालन होना चाहिए !साम्प्रदायिक समस्या भी विशेष कर हिन्दू मुसलमानो के मध्य विकराल रूप धारण किये हुए है !शायद ही कोई ऐसा दिन जाता होगा  !जिस दिन हिन्दू मुसलिम विवाद तनाव या दंगा न हो !लोकतंत्र के विकास और इसको जनता की आकांछाओं के अनुरूप बनाने के लिए इन समस्यायों का समाधान होना आवश्यक है !साम्रदायिक सद्भाव की प्राप्ति  भ्रष्टाचार से मुक्ति  सामाजिक न्याय  आदि  की प्राप्ति  अब देशवाशियों का प्रथम लक्छ्य होना चाहिए !

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