सारथी बाबा अपने अधार्मिक कुकर्मों का फल भोग रहे हैं !अधार्मिक बाबाओं को राज्य के विधान के अनुसार दंड तो मिलता ही है !इसके अलावा उनको श्रद्धालुओं के कोप और क्रोध का भाजन बनना पड़ता है !सबसे बड़ा दंड जो इन साधू महात्माओं को प्राप्त होता है !वह ईश्वरीय दंड होता है !श्रद्धालुओं की धर्म के प्रति आस्था के कारण इन बाबाओं के छिपे हुए पाप उजागर नहीं हो पाते हैं !इसीलिए लोकव्यबस्था में ये श्रद्धा के पात्र बने रहते हैं !और असीमित भोग सामग्री का भोग करते हैं !श्रद्धालुओं में नेता अभिनेता उच्चाधिकारी और सामान्य स्त्रीपुरुष भी इनको अतिशय आदर प्रदान करते हैं !किन्तु जब इनका पाप का घड़ा भर जाता है !तब उसको फूटने से कोई नहीं रोक पाता है !सामान्य मनुष्य तो कानून का उल्लंघन कर अपराध सिद्ध होने पर न्यायालय से दण्डित किये जाते हैं !और बे सजा भुगत कर अपराध मुक्त हो जाते हैं !किन्तु ये बाबा साधू सन्यासी तो भगवान के साथ धोखाधड़ी कर भगवान के विरुद्ध अपराध करते हैं !इसिलए इनको ईश्वरीय दंड विधान के अनुसार j दंड में संसार में अपयश कानून के अनुसार जेल! मरने के बाद नरक प्राप्ति ! , कूकर शूकर योनि प्राप्त होती है
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