महात्मा गांधी के जीवन का लक्छ्य था अहिंसा और उसके लिए संयम था उनके जीवन की पद्धति और सेवा था जीवन का कार्य !इसी त्रिभुज पर उन्होंने जीवन भर कार्य किया !१९०५ का बंगाल का आंदोलन अंग्रेजों के सामान के बहिष्कार का था !इसलिए उस आंदोलन में सिर्फ ब्रिटेन में निर्मित बस्तुओं का बहिस्कार किया गया था !अन्य देशों जापान आदि में निर्मित बस्तुओं का बहिस्कार शामिल नहीं था !गांधी जी का आंदोलन स्वदेश में निर्मित बस्तों के उपयोग का था !अंग्रेजो के आने के पूर्व भारत में भारत के कारीगरों द्वारा निर्मित बस्तुओं का ही उपयोग होता था !भारत में कृषिके साथ कुटीर उद्योग धंधे भी बड़ी मात्रा में प्रचिलित थे !भारत बस्त्र स्वाबलंबन में पूरी तरह आत्म निर्भर था !ढाके की मलमल की धूम सारे विश्व में थी !इसलिए गांधी जी ने चरखा को आजादी प्राप्त करने का सशक्त माध्यम बनाया !उन्होंने कहा जो काते सो पहने और जो अन्न उत्पादन करे सो खाए !गांधी जी खुद शरीर श्रम करते थे !उनकेआश्रमबासी राजकुमारी अमृत कौर सरोजनी नायडू कस्तूरवा गांधी आदि सभी शारीरिक श्रम करती थी !नेहरू मंत्रिमंडल के सभी सदस्य सूत कातते थे ! गांधी जी ने स्वतंत्रता प्राप्ति के साथ रचनात्मक कार्यक्रम जनता के सामने रखा था !जिस से जनता गरीबी से मुक्त होकर स्वाबलम्बी और आत्मनिर्भर बनजाय !स्वदेशी आंदोलन इस स्वाबलंबी जीवन की एक महत्त्वपूर्ण कड़ी थी !परतंत्रता में स्वाधीनता की अनुभूति की यह एक अभिनव योजना थी !स्वदेशी आंदोलन ने देश की जनता को आत्मनिर्भर बनाया और अंग्रेजो के आर्थिक तंत्र को भी भारत में ध्वस्त किया था !
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