Tuesday, 18 August 2015

भगवान श्री कृष्ण ने  गीता ३(२१)में कहाहै श्रेष्ठ मनुष्य जो जो आचरण करता है ! दूसरे मनुष्य वैसा वैसा ही आचरण करते हैं ! वह जो कुछ प्रमाण अपने आचरण से सिद्ध कर देता है ! दूसरे मनुष्य भी उसको प्रमाण मानकर वैसा ही आचरण करते है ! समाज में जिस मनुष्य को लोग श्रेष्ठ मानते हैं उस पर विशेष जिम्मेवारी रहती है ! कि वह ऐसा कोई आचरण ना करे तथा ऐसी कोई बात ना कहे जो लोक मर्यादा या शास्त्र मर्यादा के विरुद्ध हो !इस समय समाज की दृष्टि में समझे जाने वाले राजनेता अभिनेता और धनवान व्यक्ति तथा खेल जगत में क्रिकेट आदि खेलों से जुड़े बड़े क्रिकेट खिलाड़ी और सरकारी ओहदेदार बड़े अधिकारी तथा भूतपूर्व राजा महाराजा और बड़े ठेकेदार भू व्यबसाई आदि शादियोँ में बेशुमार खर्चे करते हैं !जिसके कारण उनकी होड़ करने वाले साधारण गृहस्थ भी अपनी आर्थिक स्थिति से अधिक ऋण लेकर शादियों में अधिक खर्च करते दिखाई !देते हैं !और साधारण आदर्शवादी गृहस्थोँ की इन खर्चीली भड़कीली शादियों के कारण अपमान और शर्मिंदगी झेलनी  पड़ती है !इन तथाकथित समाज के श्रेष्ठ व्यक्तियोँ की कथनी और करनी में जमीन आसमान का अंतर होता है !ये जवान से राग अलापते है कि खर्चीली शादी बंद करो  ! किन्तु अपनी पुत्र पुत्रियोँ की शादी में बेशुमार रूपया खर्च करते हैं !इस भारतीय प्रशासनिक अधिकारी ने यह शादी बिना तड़क भड़क के और  दहेज़ न लेकर बिना गाजे बाजे और मामूली सामान्य भोजन बरातियों को कराकर  संपन्न करायी है !इसका समाज में अच्छा सन्देश जाएगा  !और लोग बिना फिजूल खर्ची वाली शादी की और उन्मुख होकर सादा शादियां करने कराने की और अग्रसर होंगे !

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